समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सनातन धर्म में गरुड़ पुराण को अहम दर्जा दिया गया है। पुराण में भगवान विष्णु ने जीवन में सफल होने के बारे में उल्लेख किया है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, हर इंसान को अपने जीवन काल में एक बार जरूर गरुड़ पुराण का पाठ अवश्य करना चाहिए। तो आइए गरुड़ पुराण के बारे में रोचक बातों को जानते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लोगों के लिए गरुड़ पुराण में कई तरह की धारणाएं मौजूद हैं। लोगों को लगता है कि गरुड़ पुराण का पाठ किसी की मृत्यु के बाद ही पढ़ा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गरुड़ पुराण को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है। पहला आचारखंड, दूसरा धर्म कांड और तीसरा ब्रह्माकांड। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आचारखंड या पूर्वखंड को गरुड़ पुराण का पहला भाग में रखा गया है। ऐसे में इस भाग का पाठ कभी किया जा सकता है।
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गरुड़ पुराण के पहले भाग यानी आचारखंड में सृष्टि की उत्पत्ति, ध्रुव चरित्र, ग्रहों के मंत्र, उपासना की विधि, ज्ञान, भक्ति, दान, वैराग्य, तप, जप, तीर्थ और सदाचार, सत्कर्म, यज्ञ जैसी कई बातों का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को अपने जीवनकाल में गरुड़ पुराण के पहले भाग का पाठ जरूर करना चाहिए। जिससे व्यक्ति अपने जीवन में आत्मसात अवश्य कर सके।
- मान्यता है कि जो जातक इस भाग का पाठ करता है, वह बुरे कर्मों से दूर रहता है, साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और मृत्यु के बाद व्यक्ति को मोक्ष प्राप्ति में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है।
- ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने 3 ऐसे कार्यों के बारे में बताया है, जिससे व्यक्ति सफलता के मार्ग पर चल सकता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन 3 कार्यों की शुरुआत करता है, तो उसके जीवन में हर समय लाभ हो सकता है। इसके साथ ही वह जीवन में सफल भी हो सकता है।
बस इन कार्यों के साथ करें दिन की शुरुआत
- गरुड़ पुराण के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को नियमित रूप से स्नान करना चाहिए और भगवान की पूजा जरूर करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जो जातक नियमित रूप से पूजा-पाठ के साथ दिन की शुरुआत करते हैं, उन्हें देवी-देवताओं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हर कार्य में सफलता भी मिलता है।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सुबह के समय भोजन ग्रहण करने से पहले भगवान को भोग जरूर लगाएं। इसके बाद ही भोजन ग्रहण करें। मान्यता है कि इस तरह भोजन ग्रहण करने से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती है साथ ही अपना आशीर्वाद भी देती है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जो जातक इस तरह भोजन ग्रहण करता है। जीवन में कभी भी सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती है।
- गुरुण पुराण के अनुसार, हर व्यक्ति को दिन में एक बार आत्मचिंतन जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से सही-गलत के बीच भेद पता चलता है। मन में नए विचार आते हैं।



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