समाचार सच, मुंबई डेस्क। भारतीय संगीत जगत में एक युग के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली आशा भोसले का नाम उन गायिकाओं में शामिल है, जिनकी आवाज़ ने न केवल पीढ़ियों को प्रभावित किया, बल्कि हर दौर में खुद को नए तरीके से प्रस्तुत कर यह साबित किया कि एक असली कलाकार समय के साथ और भी बेहतर होता है।
आशा भोसले ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत केवल 10 साल की उम्र में की थी। एक इंटरव्यू में गायिका ने बताया कि उनका पहला गाना 1943 में रिकॉर्ड हुआ था, जब वह सिर्फ 10 साल की थीं। उन्होंने कहा, ‘मुझे उस वक्त बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि माइक क्या होता है। लेकिन जब मैंने गाना शुरू किया, तो मुझे यकीन हो गया कि मैं भी गा सकती हूं।’
आशा भोसले के नाम पर लगभग 12,000 गाने हैं, जो उन्होंने 20 अलग-अलग भाषाओं में गाए हैं। इस उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी जगह मिली है। उनकी आवाज़ ने शास्त्रीय संगीत से लेकर कव्वाली, पॉप, कैबरे और अन्य शैलियों में सफलता प्राप्त की है।
उन्होंने हिंदी, मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बंगाली, और अन्य कई भाषाओं में गाने गाए। उनके गाने, जैसे कि ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां), ‘ये मेरा दिल’ (डॉन), और ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ (तीसरी मंजिल), आज भी लोगों के दिलों में गूंजते हैं।
भारत सरकार ने उनकी कला को सम्मानित करते हुए उन्हें ‘पद्म विभूषण’ और ‘दादासाहेब फाल्के’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान दिए थे।
दुखद खबर है कि आशा भोसले का निधन हो गया है। शनिवार को उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार सुबह 92 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके बेटे आनंद भोसले ने इस खबर की पुष्टि की। उनका अंतिम संस्कार सोमवार शाम 4 बजे किया जाएगा।



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