समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देवी माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह रूप तप, त्याग और संयम का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सही विधि से पूजा करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और साधना में शक्ति मिलती है।
पूजा विधि – सुबह की तैयारी
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- साफ कपड़े पहनें (सफेद या हल्के रंग शुभ माने जाते हैं)
- पूजा स्थान को साफ करें और माता की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें
संकल्प लें
हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत/पूजा का संकल्प करें
देवी का ध्यान
माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें, उन्हें हाथ में जपमाला और कमंडल लिए हुए रूप में स्मरण करें
पूजन सामग्री अर्पित करें रोली, चंदन, अक्षत चढ़ाएँ सफेद फूल अर्पित करें, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएँ (यदि संभव हो) शक्कर, मिश्री या फल का भोग लगाएँ
मंत्र जाप – इस मंत्र का जाप करें
ऊँ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः (108 बार)
आरती करें, घी का दीपक जलाकर आरती करें, अंत में प्रसाद वितरित करें
खास बातें – इस दिन सादगी और संयम रखना विशेष फलदायी माना जाता है, व्रत रखने वाले केवल फलाहार करें, मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखें



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