वन्यजीवों से बढ़ते खतरे पर सीएम धामी सख्त, गुलदार-हाथी इलाकों में हाई अलर्ट, सुरक्षा इंतजाम तेज

खबर शेयर करें

समाचार सच, देहरादून। उत्तराखण्ड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित उत्तराखण्ड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक में वन्यजीवों से होने वाली घटनाओं पर गहरी चिंता जताई गई और इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस व त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भालू, गुलदार, बाघ और हाथी से प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए। वन विभाग और जिला प्रशासन के बीच संयुक्त निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।

सीएम धामी ने संवेदनशील इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग, डिजिटल सर्विलांस और अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित गांवों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग, हनी-बी फेंसिंग, वॉच टावर और अन्य सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएं और रैपिड रिस्पॉन्स टीम को हर समय अलर्ट मोड में रखा जाए।

यह भी पढ़ें -   21 फरवरी 2026 रविवार का पंचांग, जानिए राशिफल में आज का दिन आपका कैसा रहेगा

मुख्यमंत्री ने राज्य के हाथी और बाघ कॉरिडोर सहित सभी वन्यजीव कॉरिडोरों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन मार्गों पर अंडरपास, ओवरपास और एनिमल पास के निर्माण को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौजूदा नियमों में बदलाव की आवश्यकता हो तो संबंधित विभाग तत्काल संशोधन प्रस्ताव शासन को भेजें।

सीएम धामी ने जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित वन्यजीव समन्वय समितियों को सक्रिय रखने और संवेदनशील जिलों, ब्लॉकों व गांवों की हॉटस्पॉट मैपिंग शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, जलस्रोतों और पैदल मार्गों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए, ताकि वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित न हों।

उन्होंने ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए रिजर्व फॉरेस्ट के साथ-साथ वाइल्डलाइफ सेंचुरी और कंजरवेशन रिजर्व क्षेत्रों में भी योजनाबद्ध कार्य करने के निर्देश दिए। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन में पशु चिकित्सकों की तैनाती पर भी जोर दिया गया।

यह भी पढ़ें -   कोटद्वार से युवती के साथ घूमने आए युवक की नैनीताल के होटल में संदिग्ध मौत, जांच जारी

बैठक में वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े 9 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई, जबकि संरक्षित क्षेत्रों की 10 किलोमीटर परिधि में उपखनिज चुगान से संबंधित 22 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेजने का निर्णय लिया गया।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

बैठक में पिछली 21वीं बैठक में लिए गए निर्णयों पर हुई कार्रवाई की जानकारी देते हुए प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में जान गंवाने वालों के लिए अनुग्रह राशि 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। 32 वन प्रभागों में 93 क्विक रिस्पॉन्स टीम गठित की गई हैं और पिथौरागढ़, चम्पावत व रुद्रप्रयाग में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं।

बैठक में विधायक दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश सिंह चौहान, बंशीधर भगत, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, डीजीपी दीपम सेठ सहित बोर्ड के अन्य सदस्य और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Ad AdAd Ad Ad Ad AdAd Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440