समाचार सच, हल्द्वानी। हल्द्वानी में 46 प्राइवेट स्कूलों को नोटिस दिए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इंस्पिरेशन स्कूल के प्रबंधक दीपक बल्यूटिया ने प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय की ओर से किसी भी अभिभावक पर निर्धारित विक्रेताओं से ही पुस्तकें खरीदने का कोई दबाव नहीं बनाया गया। विद्यालय द्वारा पुस्तकों की सूची माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार तय की गई थी और सत्र शुरू होने से पहले ही अभिभावकों की सुविधा के लिए इसे स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया था।
दीपक बल्यूटिया ने एक अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड में प्रकाशित NCERT पुस्तकों की कीमतें दिल्ली में प्रकाशित उसी किताबों की तुलना में काफी अधिक हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जहाँ दिल्ली में छपी एक पुस्तक की कीमत लगभग 65 रुपये है, वहीं उत्तराखंड में प्रकाशित वही पुस्तक कहीं अधिक दाम पर उपलब्ध है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि कीमतों में इतना अंतर क्यों है और इसका लाभ आखिर किसे मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि यह अंतर कुल मिलाकर करोड़ों रुपये तक पहुँचता है। जब वही NCERT की किताबें दिल्ली से लगभग आधे दाम में उपलब्ध हैं, तो उत्तराखंड में उन्हें अधिक कीमत पर क्यों छापा और बेचा जा रहा है। इससे न केवल राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि गलत संदेश भी जा रहा है।
बल्यूटिया ने आगे कहा कि SCERT ने NCERT से सरकारी विद्यालयों और 25 प्रतिशत आरक्षित श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए पुस्तकों के प्रकाशन की अनुमति ली है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उत्तराखंड में प्रकाशित पुस्तकों को खुले बाजार में निजी विद्यालयों के लिए बेचने की भी अनुमति ली गई है या नहीं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं है, तो ये पुस्तकें खुले बाजार में कैसे बिक रही हैं और निजी स्कूलों पर इन्हें खरीदने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे एक गंभीर विषय बताते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है।



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