सही से पाचन नहीं होता, इसलिए बढ़ता है मोटापा व कोलेस्ट्राल

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देर रात खाएंगे तो पचाएंगे कब?
समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में हुए शीघ्र में खुलासा हुआ कि रात में देर से खाने की आदत का दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। गलत समय पर खाने से दिमाग और शरीर की जैव घड़ी का तालमेल गड़बड़ा जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने से मस्तिष्क को नई चीजें सीखने और उन्हें याद रखने में दिक्कतें आने लगती हैं। इसके अलावा मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाइपर एसीडिटी, ग्रासनली के कैंसर का खतरा भी बढ़ता है। देर रात खाने के तुरंत बाद सोने में हृदयघात की आशंका बढ़ती है।
15.5 करोड़ लोग मोटापे से ग्रस्त हैं देश में। भारत में मोटापे में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। (नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे के अनुसार) 10 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर से परेशान हैं। गलत खानपान, मोटापा, तनाव और जेनेटिक कारणों से यह दिक्कत युवाओं में भी बढ़ रह रही हैं।
समय से भोजन करें – भागदौड़ भरी जिंदगी में खाने के लिए अक्सर लोग समय नहीं निकाल पाते हैं। साथ ही घर के खाने की बजाय बाहर से, इंस्टेंट फूड (फास्ट व जंक) खाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार सही मात्रा व समय के अनुसार भोजन करने से शारीरिक व मानसिक बल, पूर्ण तृप्ति, पोषण, त्वचा की कांति व बुद्धि प्रखर होती है।
सबसे महत्वपूर्ण किस समय, क्या खाते हैं? सुबह ब्रेकफास्ट व रात में डिनर का समय व तरीका दोनों बिगड़ने की वजह से शारीरिक दिक्कतें बढ़ रही है। सुबह उठने के दो से तीन घंटे में नाश्ता व रात 8 बजे तक डिनर जरूरी है। इसके बाद जितना देर से डिनर करते हैं, शरीर पर उतना ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ता है।
पाचन संबंधी बीमारियां – देर रात भोजन का सीधा दुष्प्रभाव पाचन क्षमता पर पड़ता है। पाचन शक्ति क्षीण होती है। भोजन अच्दे से पचता नहीं है। पेट फूलना, साफ न होना, कब्ज, बवासीर, बड़ी-छोटी आंत संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।
अनिद्रा व थकान – देर रात खाने में भारीपन, थकान, अनिद्रा की शिकायत बढ़ती है। रात में नींद टूटती है। उच्च रक्तचाप, डायडिबीज, इनफर्टिलिटी की समस्या बढ़ती है। आदतों में बदलाव न करने से त्वचा व कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कोलेस्ट्रॉल व मोटापा – देर रात खाने के बाद जल्दी सोने से लिवर पर दबाव बढ़ता है। भोजन अच्छे से पचता नहीं है। यह कोलेस्ट्रॉल के रूप में जमना शुरू हो जाता है। यह मोटापा व हृदय रोगों के प्रमुख कारणों में से एक है।
मस्तिष्क पर असर- पर्याप्त नींद नहीं ले पाने से मस्तिष्क पर गलत असर पड़ता है। इससे मूड में बदलाव की आशंका बढ़ती है। डिप्रेशन, निर्णय लेने की क्षमता घटती है। दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
63 प्रतिशत भारतीय 8 से 9 बजे के बीच भोजन करते हैं। 28 प्रतिशत देर से करते हैं। यह प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है। (होम कुकिंग एंड इंटिंग हैबिट के ग्लोबल सर्वे के अनुसार)
बनेगी सेहत
ये चीजें न लें –

  • रात में दाल, चावल, राजमा जैसी चीजों को खाने से परहेज करें।
  • मोनो – अनसेंचुरेटेड युक्त (सूरजमुखी, जैतुन, मुंगफली) तेल खा सकते हैं।
  • इससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। मोटापे की समस्या में भी मदद मिलती है।
  • रात का खाना तैलीय, मसालेदार, आइसक्रीम और वसायुक्त न हो।
  • रात में जंकफूड, कैफीनयुक्त चीजों का प्रयोग न करें। (साभार: निरोगाधाम)
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