समाचार सच, नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में सूचना का अधिकार अधिनियम के कथित दुरुपयोग को लेकर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आरटीआई कानून का इस्तेमाल पारदर्शिता के लिए है, न कि सरकारी तंत्र को बाधित करने के लिए।
मामला डीएम कार्यालय में कार्यरत प्रधान सहायक मोहम्मद अकरम से जुड़ा है, जिन्होंने आरटीआई के तहत अपने ही कार्यालय के विभिन्न पटलों से बड़ी मात्रा में जानकारी मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी द्वारा सीमित संसाधनों के बावजूद कई दिनों की मेहनत के बाद करीब तीन हजार पृष्ठों की सूचना तैयार कर निरूशुल्क उपलब्ध कराई गई, लेकिन इसके बाद भी संबंधित कर्मचारी ने बिना किसी ठोस कारण के सूचना लेने से इनकार कर दिया।
प्रशासन के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया से न केवल सरकारी समय और संसाधनों की बर्बादी हुई, बल्कि नियमित कार्यालयीन कार्य भी प्रभावित हुआ। जिलाधिकारी ने अपने आदेश में कहा कि आरटीआई अधिनियम का उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, न कि इसे दबाव बनाने या दुरुपयोग का साधन बनाया जाए।
डीएम ने अपने आदेश में सर्वाेच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार विवेकपूर्ण और जिम्मेदारी के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए। विशेष रूप से सरकारी सेवकों से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून का उपयोग संयम और मर्यादा में करें।
प्रकरण को गंभीर मानते हुए प्रधान सहायक मोहम्मद अकरम को औपचारिक रूप से भर्त्सना जारी की गई है और भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न करने की सख्त चेतावनी दी गई है। साथ ही प्रशासनिक दृष्टि से उनका जिला मुख्यालय से स्थानांतरण भी कर दिया गया है।

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