समाचार सच, नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में जंगली जानवरों की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल बना दिया है। आए दिन हो रहे वन्यजीव हमलों के कारण लोग खेतों में जाने से कतरा रहे हैं और शाम होते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा चिंता स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर है, जिन्हें लेकर अभिभावक भी आशंकित हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने धारी, ओखलकांडा और रामगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों (कक्षा 1 से 12 तक) तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में 19 से 21 जनवरी तक अवकाश घोषित कर दिया है।
जिलाधिकारी कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि हाल के दिनों में इन क्षेत्रों में जंगली जानवरों की आवाजाही काफी बढ़ गई है, जिससे बच्चों के स्कूल आने-जाने के दौरान खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने साफ किया है कि बच्चों की जान-माल की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है।
डीएम ललित मोहन रयाल ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए तीन दिन का अवकाश घोषित किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”
वन विभाग को संवेदनशील इलाकों में 24 घंटे निगरानी रखने, गश्त बढ़ाने और जंगली जानवरों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग को भी आपसी समन्वय से त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है।
प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को अकेले बाहर न भेजें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन या वन विभाग को दें। गौरतलब है कि हाल ही में धारी क्षेत्र में दो महिलाएं जंगली जानवरों का शिकार हो चुकी हैं, जिसके बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।


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