समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। आंवला मनुष्य को प्रकृति की एक अनुपम भेंट हैं। औषधीय गुणों से भरपूर, पोषक तत्वों का खजाना आंवला आज दुनिया के दूसरे अन्य देशों में भी काफी बड़ी मात्रा में दवाइयों का खजाना आंवला आज दुनिया के दूसरे अन्य देशों में भी काफी बड़ी मात्रा में दवाइयों और भोजन में इस्तेमाल हाता है। आधुनिक शोधों से भी यह बात आज प्रमाणित हेा चुकी है कि त्रिदोष नाशक आंवले जैसा अन्य कोई और फल नहीं है। संस्कृत में इस तिष्यफला, अमृता, पंचरसा, आमलकी, जाती फल आदि नामों से पुकारा जाता है। हिंदी में इसे आंवला, आंवड़ा, औड़ा और औरा कहा जाताह ै। हमारे देश में यह उत्तरी भारत, अवध, बिहार एवं पूर्वी प्रदेशों में उगाया जाता है। इसकी तीन प्रजातियां होती हैं, जिनमें कल्मी बीजू और जंगली होती है। इसे जंगली इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह प्राकृतिक अवस्था में रेशों से भरा आकार में छोटा और खाने में कसैला होता है।
आंवले में विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। 100 ग्राम आंवले में 600 से 621 मिलीग्राम विटामिन-सी होता है। इसके अलावा इसमें टेनिन, गैलिक एसिड और ग्लूकोज पाया जाता है। इसमें मौजूद विटामिन-सी सुखाने के बाद भी बना रहता है। तमाम फलों में यह विशेषता सिर्फ आंवले में ही पायी जाती है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, रेशे, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, निकोटिन पाया जाता है।
उपयोग – आंवले से चटनी, मुरब्बा, आचार, शैम्पू, च्यवनप्राश तथा दवाइयां बनाने के अलावा चमड़े को रंगने के लिए इसकी वृक्ष के छाल का भी उपयोग होता है।
भारत से आंवला कई देशा को निर्यात करके मुद्रा अर्जित की जाती है।
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में आंवले का उपयोग –
-त्रिदोष नाशक आंवले का उपयोग आयुर्वेदिक औषधी बनाने में किया जाता है।
-पका या सूखा आंवला रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है।
-इसके लौह तत्व की मौजूदगी, खून की कमी और पीलिया को रोकने में सहायक होती है।
-यह खांसी में अत्यन्त उपयोगी होता है।
-इसके फल को चीरने से निकले रस से आंखों की सूजन का इलाज होता है।
-लोगों के बीच लोकप्रिय च्यवनप्राश में भी आंवले का उपयोग किया जाता है।
-आंवले का चूर्ण पेट संबंधी रोगों को दूर करता है।
आंवले का बीज –
आंवले का बीज बेहद कठोर और उपयोगी होता है। यह दमा और श्वांस संबंधी बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है। आंवले के पेड़ प्राप्त करने के लिए इसके बीज को क्यारियों में बोने से पहले पानी में भिगोकर फुला लिया जाता है। अंकुरण के पश्चात जब इसके पौधे 10 से 15 सेंटीमीटर तक के हो जाते हैं तब इन्हें 5 से 7 मीटर के अंतर पर लगाया जाता है। आंवला दिल की बीमारी में भी लाभकारी होता है। इसके सूखे फल के गूदे से बनाये गये चूर्ण का उपयोग कई औषधियों में किया जाता है। यह कोलेस्ट्रोल की मात्रा बनने से रोकता हे। यही वजह है कि इसे लोगों के आम जीवन में ही नहीं बल्कि चिकित्साशास्त्र में भी विशेष महत्व दिया गया है।


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