कोलेस्ट्राल को कैसे करें कंट्रोल: कारण, लक्षण और उपचार

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। कोलेस्ट्राल शरीर के क्रियाकलाप में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह कोशिकाओं की दीवारों का निर्माण करने और विभिन्न हार्मोंस को बैलेंस करने के लिए भी जरूरी होता है. इनमें एचडीएल को अच्छा कोलेस्ट्राल तथा एलडीएल को बुरा कोलेस्ट्राल कहते हैं.
एलडीएल को बुरा इसलिए कहते हैं, क्योंकि यह कोरोनरी धमनियों में अवरोध उत्पन्न करता है, जिससे रक्त संचार में बाधा होती है और हार्ट अटैक की स्थिति पैदा होती है. एचडीएल कोलेस्ट्राल इसलिए अच्छा है, क्योंकि यह धमनियों में अवरोध बनने से रोकता है।
कोलेस्ट्राल के रिस्क फैक्टर्स
-हाई कोलेस्ट्राल से ग्रस्त लोगों में कोई लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते, जब तक कोलेस्ट्राल दिल व दिमाग की तरफ़ जानेवाली धमनियों को काफी संकरा नहीं कर देता है। इसके परिणामस्वरूप सीने में दर्द होता है।
-रक्त में कोलेस्ट्राल बढ़ जाने से पथरी रोग, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और गुर्दे की बीमारी हो सकती है।

  • हाई कोलेस्ट्राल होने पर ये बढ़ते-बढ़ते नसों में उतर आता है, जिससे चलना-फिरना कठिन हो जाता है.
    -हार्ट अटैक, किडनी डिसआर्डर, थायरायड, लकवा जैसे रोग कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ने से हो सकते हैं। इनसे बचने के लिए दवा के साथ-साथ अपने खानपान पर ध्यान देना भी जरूरी है। कोलेस्ट्राल कंट्रोल करके हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों की वजह से होनेवाली अकाल मृत्यु को रोका जा सकता है।
    कोलेस्ट्राल के कारण और लक्षण -रक्त में कोलेस्ट्राल बढ़ने के कारणों को तीन भागों में बांटा गया है।
    -कोलेस्ट्राल बढ़ानेवाले आहार यानी वसायुक्त खाद्य पदार्थ का अधिक मात्रा में लगातार सेवन करना।
  • मेटाबालिक सिस्टम जब एलडीएल की मात्रा को पर्याप्त रूप में रक्त से बाहर नहीं कर पाता, तो रक्त में एलडीएल का स्तर बढ़ जाता है.
    -तीसरी स्थिति वह होती है, जब लिवर कोलेस्ट्राल को अधिक मात्रा में बनाने लगता है.
    -उपरोक्त कारणों को यदि नियंत्रण में रखा जाए, तो हाई कोलेस्ट्राल की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी.
    -जहां तक लक्षणों की बात है, तो थकान, कमज़ोरी, सांस लेने में तकलीफ़, अधिक पसीना आना, सीने में दर्द, बेचौनी-सी महसूस होना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।
    कोलेस्ट्राल को कंट्रोल में रखने के लिए क्या खाएं?
    -अपने खानपान में अधिकाधिक मौसमी फल व सब्ज़ियों को शामिल करें।
    -इनमें संतरे का जूस प्रमुख है, जिसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है।
    -जीरो कोलेस्ट्राल वाले पदार्थ, जैसे- ताज़ा फल, सब्ज़ियां और फ़ाइबरयुक्त पदार्थ अपने भोजन में शामिल करें।
    -सुबह नाश्ते में कार्नफ्लैक्स जैसे आहार फ़ायदेमंद रहते हैं।
    ये न खाएं –
  1. रेड मीट का सेवन न करें।
    2.दूध, बटर, घी, क्रीम यहां तक कि आइस्क्रीम जैसे पदार्थ, जिनमें भारी मात्रा मेें कोलेस्ट्राल होता है, खाने से बचें।
  2. मावा से बनी मिठाइयां स्लो पाइजन का काम करती हैं, इनसे दूर ही रहें।
  3. सिगरेट-शराब का सेवन कम करें।
    सावधानियां – दवा के अलावा कुछ सावधानियों और खानपान में सुधार लाकर भी कोलेस्ट्राल को कंट्रोल किया जा सकता है, क्योंकि खानपान व रहन-सहन के तौर-तरीक़ों में बिगड़ते संतुलन की वजह से ही शहरी लोग विशेष रूप से हाई कोलेस्ट्राल (एलडीएल) के शिकार हो रहे हैं।
    -डाक्टर की सलाह के अनुसार अपने खानपान और जीवनशैली में परिवर्तन करें।
    -शरीर का वजन बढ़ने न दें। शरीर की एक्स्ट्रा कैलोरीज बर्न करें यानी ज्यादा से ज्यादा पैदल चलें।
    -नियमित एक्सरसाइज इसमें मददगार है। जागिंग, स्विमिंग, डांसिंग और एरोबिक्स नियमित रूप से करें।
    -बिल्डिंग मेें चढ़ने के लिए लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
  • यदि आपको हार्ट से जुड़ी बीमारी होने का ज़रा भी शक है, तो तुरंत हार्ट स्पेशलिस्ट की सलाह लें।
    -जो लोग चिकनाई वाले आहार कम खाते हैं, उनके शरीर में बैड कोलेस्ट्राल का अनुपात कम होता है।
    -खाद्य पदार्थ ख़रीदते समय उनके लेबल गौर से पढ़ लें। ऐसे ही पदार्थ खरीदें, जिनमें वसा और कोलेस्ट्राल की मात्रा कम हो।
    कोलेस्ट्राल की जांच –
    -20 साल की उम्र से अधिक आयुवालों को हर 5 साल में कोलेस्ट्राल का टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।
    -टेस्ट में लिपोप्रोटीन टेस्ट करवाना जरूरी होता है, जिससे आपका कोलेस्ट्राल लेवल पता चलता है।
    -यह भी देखा गया है कि मेनोपाज से पहले एक ही उम्र के स्त्री-पुरुषों में कोलेस्ट्राल का स्तर अलग-अलग होता है। स्त्रियों में पुरुषों के मुक़ाबले कोलेस्ट्राल का स्तर कम होता है।
    -लेकिन मेनोपाज के बाद स्त्रियों में पुरुषों की अपेक्षा कोलेस्ट्राल का स्तर काफी ज्यादा पाया जाता है।
    -ऐसे में मेनोपाज के बाद महिलाओं को अपने कोलेस्ट्राल स्तर पर खास ध्यान देना चाहिए।
    हाई कोलेस्ट्राल को कंट्रोल करने की होम रेमेडीज –
    -1 कप गर्म पानी में 1-1 टीस्पून शहद और नींबू का रस मिलाकर रोज़ सुबह पीने से कोलेस्ट्राल का स्तर प्राकृतिक रूप से कम होता जाता है।
    -1 ग्लास पानी में 2 टेबलस्पून साबूत धनिया उबाल लें। ठंडा होने पर छान लें। इसे दिन में दो बार पीएं।
    -प्याज का रस न सिर्फ कोलेस्ट्राल के स्तर को कम करता है, बल्कि खून साफ़ करके हृदय को भी मज़बूत करता है।
    -विटामिन ई से भरपूर डायट लें, जैसे- सूरजमुखी के बीज, सोयाबीन आयल, अंकुरित अनाज आदि।
    -विटामिन बी 6 भी लें।
    -इसके अलावा रोज़ाना लहसुन खाएं। गुग्गुल भी बहुत फ़ायदेमंद है।
    -गिलोय और कालीमिर्च पाउडर के मिश्रण को रोजाना दिन में दो बार 3 ग्राम की मात्रा में खाएं।
    -1 ग्लास पानी में 1 टीस्पून मेथी पाउडर मिलाकर 1 महीने तक रोज खाली पेट पीने से कोलेस्ट्राल का स्तर कम होता है।
    -मेथीदाने का नियमित सेवन भी काफी फायदेमंद होता है।
    -रोजाना 1 टेबलस्पून शहद के सेवन से भी कोलेस्ट्राल नियंत्रण में रहता है।
    -कुकिंग के लिए सनफ्लावर ऑयल का ही इस्तेमाल करें।
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