समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। भादो माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी में यानी अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 31 अगस्त 2022 बुधवार को गणेश चतुर्थी के दिन गणपतिजी की मूर्ति स्घ्थापना होगी। गणेश चतुर्थी के दिन घर में कैसे करें गणपतिजी की प्रतिमा की स्थापना और फिर पूजा? आओ जानते हैं सरल विधि।
स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त – सुबह 11.04.43 से दोपहर 13.37.56 के बीच गणेशजी की स्थापना करें। यदि आप शाम को करना चाहते हैं तो शाम 05.42 से 07.20 के बीच करें।
- गणेश मूर्ति लाने के पूर्व घर और द्वार को सजाएं और पूजा की तैयारी कर लें।
- फिर विधिवत रूप से जयकारे के साथ गणेशजी का घर में मंगल प्रवेश कराएं। मंगल गीत गाएं और आरती उतारें।
- गणेश मूर्ति को स्थापित करने के पूर्व उत्तर या ईशान कोण को साफ करके कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं और हल्दी से चार बिंदी बनाएं।
- फिर एक मुट्ठी अक्षत रखें और उस पर लकड़ी का एक पाट रखें और उस पर लाल, पीला या केसरिये रंग का सूती कपड़ा बिछाएं।
- पाट के सामने रंगोली बनाएं। तांबे के कलश में पानी भरकर उसमें आम के पत्ते रखें और उस पर नारियल रखें। कलश को मौली बांधें।
- आसपास सुगंधित धूप, दीप, अगरबत्ती, आरती की थाली, आरती पुस्तक, प्रसाद आदि पहले से रख लें।
- ऊँ पुण्डरीकाक्ष पुनातु, ऊँ पुण्डरीकाक्ष पुनातु, ऊँ पुण्डरीकाक्ष पुनातु बोलकर गणेश मूर्ति को स्थापित करने के पूर्व निम्न मंत्र बोलें।
- फिर स्थापना के दौरान यह मंत्र बोलें- गजाननं भूतगणादिसेवितम कपित्थजम्बू फल चारू भक्षणं। उमासुतम शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम।। आगच्छ भगवन्देव स्थाने चात्र स्थिरो भव।
- अब परिवार के सभी सददस्य एकत्रित होकर घ् गंगणपते नमरू का उच्चारण करते हुए प्रतिमा को पाट पर विराजमान करें और गणपति बप्पा मोरिया का जयघोष करें।
- अब गणेशजी की विधिवत पूजा करके आरती करें और प्रसाद बांटें।
कैसे करें गणेशजी की पूजा?-
पूजा सामग्री: सबसे पहले गणेशजी की पूजा के लिए पूजा सामग्री एकात्रित कर लें। जैसे माला, फूल, अक्षत, पंचामृत, कंकू, हल्दी, मिठाई, लड्डू, धूप, दीप, अगरबत्ती, दीपक, चौकी या आसन, कलश, नारियल, आम के पत्ते, केले के पत्ते, दूर्वा, जनेऊ, सिन्दूर, अबीर, गुलाल, सुगंधित (इत्र), ऋतुफल, लौंग-इलायची, सुपारी, आदि।
- गणेशजी को आसन या चौकी पर विधिवत विराजमान या स्थापित करने के बाद उनकी पंचोपचार या षोडोषपचार पूजन की शुरुआत करें।
- पहले मुट्ठीभर चावल के उपर जल भरा कलश स्थापित करें और उसमें आम के पत्ते रखें और उसके उपर नारियल। कलश की पूजा करें।
- अब केले के पत्तों से पूजा स्थल को सजाएं।
- अब धूप दीप प्रज्वलित करें और फिर उन्हें माला पहनाएं।
- माला पहनाने के बाद उन्हें तिलक लगाएं, फूल अर्पित करें और फिर एक-एक करके सभी पूजा सामग्री अर्पित करें।
- फिर उन्हें उनकी पसंद का भोग और नैवेद्य लगाएं।
- उनके बाद उनकी आरती उतारें।
- आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरण करें।
- अंत में चतुर्थी की कथा सुनें और यदि व्रत रख रखा है तो फलाहार ग्रहण करें।
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