समाचार सच, नैनीताल। कुमाऊं की कुलदेवी मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही नैनीताल में मां नंदा-सुनंदा महोत्सव की शुरुआत हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नंदा अष्टमी के पावन अवसर पर मां नंदा-सुनंदा अपने मायके धरती पर पधारी हैं। प्राण प्रतिष्ठा के बाद मां नैना देवी मंदिर को भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया है। परंपरा के अनुसार, 5 सितंबर को एकादशी के दिन मां अपनी ससुराल लौट जाएंगी।
मां की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का कार्य तड़के 2 बजे शुरू हुआ, जब पुजारी भगवती प्रसाद जोशी ने विशेष पूजा-अर्चना की। यह पूजा सुबह करीब 5रू30 बजे तक चली, जिसके बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। हर साल नंदा अष्टमी पर देश-विदेश से हजारों भक्त मां नैना देवी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मां नंदा-सुनंदा को कुमाऊं क्षेत्र के लोग अपनी कुलदेवी मानते हैं। उनकी मूर्तियां केले के पेड़, रुई, कपड़े और बांस से बनाई जाती हैं। चंद राजवंश के समय से ही मां नंदा-सुनंदा की पूजा कुलदेवी के रूप में की जाती रही है। मान्यता है कि मां साल में एक बार अष्टमी के दिन कुमाऊं की धरती पर अपने मायके आती हैं, जिसके लिए विभिन्न स्थानों पर उनकी प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है।
अगले चार दिनों तक कुमाऊं में भक्त मां नंदा-सुनंदा की आराधना करेंगे। 5 सितंबर को मां की मूर्तियों का नैनी झील में विसर्जन किया जाएगा, जो बेटी की ससुराल विदाई की परंपरा का प्रतीक है। नंदा अष्टमी के अवसर पर नैनीताल के मां नैना देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। ब्रह्म मुहूर्त में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मां के डोले को मंदिर परिसर में दर्शन के लिए रखा गया है।
श्रीराम सेवक सभा के मीडिया प्रभारी ललित तिवारी ने बताया क आज पूरा नैनीताल मां नंदा-सुनंदा की भक्ति में डूबा हुआ है। भक्त लंबी कतारों में मां के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांग रहे हैं। यह उत्सव पूरी तरह मां को समर्पित है। शाम को पंच आरती के बाद भक्तों में प्रसाद वितरित किया जाएगा।

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