निजीकरण के खिलाफ मिला जुला रहा भारत बंद का असर

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हल्द्वानी में कई ट्रेड यूनियनों के नेता व सदस्यों ने किया प्रदर्शन, नैनीताल मेें सरकार की अनदेखी पर गरजीं आशा वर्कर्स

समाचार सच, दिल्ली/उत्तराखण्ड/यूपी। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ केंद्रीय मजदूर संघों के राष्ट्रव्यापी बंद के आह्वान का बुधवार को दिल्ली, उत्तराखण्ड व यूपी सहित आदि राज्यों में मिलाजुला असर देखा गया। 10 ट्रेड यूनियनों ने बुधवार को भारत बंद का आह्वान किया है। इसकी वजह से बैंकिंग, परिवहन समेत दूसरी सेवाओं पर कहीं काफी असर दिखा तो कहीं हालात एकदम सामान्य रहे।

हल्द्वानी में तिकोनिया स्थित बुद्ध पार्क में तमाम ट्रेड यूनियनों के नेता व कर्मचारियों ने मोदी सरकार पर श्रमिक विरोधी, जन विरोधी, राष्ट्र विरोधी नीतियों का आरोप लगाते हुए जोर दार प्रदर्शन कर साझा सभा की। साथ ही उपजिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकालकर राष्ट्रपति को 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रेषित किया।

यहां आयोजित ट्रेड यूनियनों का साझा मंच के बैनर तले आयोजित सभा में ऐक्टू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजा बहुगुणा ने कहा कि नोटबंदी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था मंदी के सबसे बुरे दौर में पहुंच गयी है और अंबानी पांच साल में 2 लाख करोड़ से 10 लाख करोड़ की पूंजी का मालिक हो गया है।

क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के अध्यक्ष पीपी आर्य ने कहा कि मजदूर वर्ग ही वह वर्ग है जो पंूजीपतियों की सत्ता को उखाड़ फेंकने की क्षमता रखता है। मोदी सरकार इस मुगलाते में न रहे कि उसकी सत्ता मजदूरों के खिलाफ काम करते हुए भी सुरक्षित रहेगी।

बैंक यूनियन एवं बीमा कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना था कि केंद्र सरकार आज राष्ट्रीय महत्व के सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कर रही है उन्हें बेच रही है, यह देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उनका कहना था कि आम लोगों के बैंकों को निजीकरण के हवाले करेन की तरफ धकेल कर मोदी सरकार बैंकों आम गरीब लागों से दूर कर रही हैं।

प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से ऐक्टू नेता डॉ कैलाश पाण्डेय, बीमा कर्मचारी संघ के सर्किल महासचिव डीके पाण्डे, बैंक यूनियन के गौरव गोयल, पुष्कर बिष्ट, आर के वालिया, विपिन चन्द्र, रिंकी जोशी, सरोज रावत, प्रीति रावत, भगवती बिष्ट, पारस तनेजा, बहादुर सिंह जंगी, ललित मटियाली, सेंचुरी यूनियन के नेता किशन बधरी, बीएल आर्य, रजनी जोशी, भुवन जोशी, गोविंद जीना, उमेश चंदोला, गोविंद सिंह रावत, विमला रौथाण, आनंद सिंह सिजवाली, रोहित झा सहित उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन, ग्रामीण बैंक, यूनियन बैंक, ओरियंटल बैंक, नैनीताल बैंक, केनरा बैंक, देना बैंक, उत्तराखण्ड मेडिकल एवं सेल्स एसोसिएशन, अखिल भारतीय किसान महासभा, सीटू, ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, भीम फोर्स, अम्बेडकर मिशन, राज्य पथ परिवहन यूनियन, ऐपवा आदि संगठनों के पदाधिकारी व सदस्य शामिल थे।

नैनीताल में राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत आशा वर्कर्स ने 11 सूत्रीय मांगों के लिये गांधी चौक में नारेबाजी कर केन्द्र व राज्य सरकार केा प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। आशा वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों का कहना था कि आशा वर्कर्स को राज्य में कार्य करते हुए बारह वर्ष से अधिक होने के बाद भी बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि निरंतर संघर्ष के बावजूद सरकार आशा वर्कर्स की मांगों के प्रति उदासीनता दिखा रही हैं। उनका कहना था कि आंध्र प्रदेश की सरकार ने वहां आशाओं को राज्य मद से दस हजार रुपये मासिक मानदेय देने का फैसला किया है। आशा वर्कर्सों ने एक स्वर में मांग करते हुए की आंध्र प्रदेश की तरह उत्तराखण्ड सरकार भी दस हजार रुपये प्रतिमाह राज्य मंद से आशाओं को को देने की घोषणा करने, आशाओं को दी जाने वाली वार्षिक प्रोत्साहन राशि को पूर्व की भांति आशाओं को दिये जाने, आशाओं रिटायरमेंट के बाद पेंशन का प्रवधान किये जाने, मासिक मानदेय 2000 रुपये देने की घोषणा संबंधी राज्य सरकार के शासनदेश के अनुरूप पैसा आशाओं की विभिन्न मदों की बकाया राशि को तत्काल भुगतान करने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निजीकरण और एनजीओ-करण पर रोक लगाने, ड्यूटी के दौरान दुर्घटना होने की स्थिति में आशाओं को तत्काल सहायता का प्रावधान किया जाये, आशा वर्कर की ड्यूटी के दौरान मृत्यु होन की स्थिति में उसके परिजनों को दस लाख रुपये सहायता व एक सदस्य को नौकरी का प्रावधान किये जाने साथ आदि मांग की हैं।

प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से आशा वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष कमला कुंजवाल, समुन बिष्ट, गीता नैनवाल, भगवती शर्मा, प्रेमा ब्रजवासी, कमला आर्य, रंजना पलड़िया, ज्योति ब्रजवासी, ललिता उप्रेती, तुलसी नेगी, दीपा सुयाल, नीमा पुजारी, नंदी देवी, हेमा आर्या सहित भारी संख्या में आशा वर्कर्स शामिल थी।

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