समाचार सच, हल्द्वानी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (नव संवत्सर) के साथ ही नवरात्र शुरू हो गए हैं। देवालय घंटा-घड़ियालों से गुंजायमान हो उठे। श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर मंदिरों में पहुंचे और पूजा-अर्चना कर मन्नतें मांगी। साथ ही धार्मिक अनुष्ठान भी शुरू हो गए हैं। भारतीय संस्कृति में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व है। इस दिन भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की शुरुआत होती है। इस वर्ष मंगलवार से नवसंवत्सर की शुरूआत हो गई है। इसके साथ ही चौत्र मास के नवरात्र भी शुरू हो गए हैं। नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर मंदिरों में पहुंचे और मां शैलपुत्री की पूजा की आराधना की
नवरात्र के चलते प्रातः से ही शहर व ग्रामीण क्षेत्र के मंदिर कालाढूंगी चौराहा, कालूसिद्ध मंदिर, रामलीला मैदान स्थित श्री आंवलेश्वर महादेव मंदिर, श्री राम मंदिर, प्राचीन देवी मंदिर, पिपलेश्वर महादेव मंदिर, मंगल पड़ाव प्राचीन शिव मंदिर, बरेली रोड स्थित लटुरिया आश्रम व राधा-कृष्ण मंदिर, विष्णुपुरी दुर्गा मंदिर, भोलानाथ बगीचा स्थित सत्यनारायण मंदिर, सखावत गंज स्थित वैष्णों देवी मंदिर, नवाबी रोड शिव मंदिर सहित गौलापार कालाचौड़ देवी मंदिर, रानीबाग स्थित शीतला माता मंदिर तथा हल्दूचौड़ स्थित लक्ष्मी माता आदि मंदिरों में श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया। चारों ओर मंदिरों में घंटे-घड़ियालों की गूंज सुनाई देने लगी। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मन्नतें मांगी। साथ ही मां शैलपुत्री से सुख-समृद्धि के साथ ही कोरोना संक्रमण से बचाव की कामना की। नवरात्र के साथ ही मंदिरों व घरों में धार्मिक अनुष्ठान भी शुरू हो गए हैं। इधर कोरोना संक्रमणकाल के चलते मंदिरों में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। लोग मंदिरों में सामाजिक दूरी बनाने के साथ ही मास्क का प्रयोग करते देखे गये। उधर लोग नवसंवत्सर पर एक-दूसरे को बधाईयां देते दिखे। कहीं मिष्ठान वितरण तो कहीं लोगों को तिलक लगाकर नवसंवत्सर का स्वागत किया गया।



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