नकारात्मकता से बढ़ता है तनाव

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। आज कैंसर, हृदय रोगों की तरह भयंकर रोगों में एक रोग और जुड़ गया है वह है तनाव। तनाव न केवल एक रोग है, बल्कि अन्य रोगों का भी कारण है। इस तनाव का कारण आज का मशीनी युग, पैसा कमाने की होड़ महत्वकांक्षाएं और न जाने क्या – क्या है। इसी कारण आज मनुष्य जीवन की सारी मिठास भूल चुका है। थोड़ा बहुत तनाव तो हर व्यक्ति को होता है, परन्तु समझदार व्यक्ति वहीं होता है, जो इस तनाव के लिए अप ना सुख चैन नहीं गंवाता। हर तनाव को एक चुनौती पर सफलता पाकर ही हम तनाव को कम कर सकते हैं।
कई स्त्रियां अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर तनावग्रस्त रहती है और घर के संपूर्ण माहौल को तनावपूर्ण कर देती है। इस तनाव से आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा या हो सकता है कि बच्चा भी तनाव ग्रस्त हो जाए। तनावग्रस्त व्यक्ति स्वयं ही कुढ़ता रहता है। रिश्तों में तनाव तो देखा ही जाता है, जिसमें महिलाएं सबसे अधिक तनावग्रस्त रहती हैं, क्योंकि वे अपने लिए तो जीती ही नहीं हैं। उनका सारा जीवन दूसरों की सेवा में लगा रह जाता है परन्तु आप अपनी सामर्थ्य से अधिक किसी के लिए कुछ नहीं कर सकते है, इसलिए जितना उचित है, उतना ही करें।
व्यक्ति की अपनी भी एक जिंदगी है और अपनी जिंदगी की कुछ अपेक्षाएं भी हैं, इसलिए अपनी अपेक्षाओं को दूसरों की चिंता में अपूर्ण न रहने दें। जो व्यक्ति स्वयं खुश नहीं रह सकता, वह दूसरों को कैसे खुश रख सकेगा। इसलिए बेवजह तनाव न लें। तनावपूर्ण स्थिति में नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर कई लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं। क्या आत्महत्या उनके तनाव को कम कर देती है? बिल्कुल नहीं बल्कि वे अपने पीछे एक ऐसा तनावपूर्ण माहौल छोड़ जाते हैं, जिस माहौल में उनके सभी प्रियजन सारी जिंदगी जलते रहते हैं। जीवन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण किसी तनाव का समाधान नहीं है, इसलिए नकारात्मक दृष्टिकोण एक कायरता है। आशावादी बन कर ही आप भयंकर बीमारी का सामना कर सकते हैं।

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