उत्तराखंड में बिजली के बिल में नया बदलाव, महीने के हिसाब से वसूली

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समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को नए बिलिंग प्रणाली का सामना करना होगा, जिससे महीने के हिसाब से बिजली की खरीद पर प्रभाव पड़ेगा। यह नई प्रणाली उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के आदेश के तहत लागू की जा रही है

यह आदेश यूपीसीएल (उत्तराखंड पॉवर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड) की बिजली खरीद की दरों को परिवर्तित करने के संबंध में है। अब, यूपीसीएल की द्वारा खरीदी जाने वाली बिजली की महंगाई और सस्तापन का प्रतिबिंब उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर दिखेगा।

इस नई प्रणाली के अनुसार, अगर यूपीसीएल द्वारा बिजली की खरीद में महंगाई होती है, तो यह खर्च उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा। इसका मतलब है कि अगर उपभोक्ताएं मान लें कि यूपीसीएल ने किसी महीने कुछ रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी और बाद में यह दर बढ़ा दी गई, तो उपभोक्ताओं से अधिक राशि वसूल की जाएगी। उपभोक्ताओं का बिल हर महीने घटेगा और बढ़ेगा। यानि अगर यूपीसीएल को बिजली महंगी मिली तो उपभोक्ताओं से भी ज्यादा वसूली की जाएगी। दरअसल उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने फ्यूल एंड पॉवर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) को मंजूरी दे दी है। यूपीसीएल ने इसके लिए याचिका दायर की थी। इस नियमावली के लागू होने के बाद अब हर तिमाही फ्यूल चार्ज एडजस्टमेंट (एफसीए) नहीं लगेगा। इतना ही नहीं यूपीसीएल हर नए वित्तीय वर्ष में बिजली दरों में बढ़ोतरी संबंधी याचिका अलग से दायर करेगा। इस पर आयोग जनसुनवाई के बाद दरें तय करेगा, जो हर साल एक अप्रैल से लागू होंगी।

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माना जा रहा है कि एफपीपीसीए लागू होने के बाद अप्रैल की दरों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी होगी। तय दर से अधिक की खरीद पर उपभोक्ताओं पर भार बढ़ेगा। यूपीसीएल के लिए बाजार से बिजली खरीद के लिए 4.72 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की गई है। बिजली की भारी मांग के बीच यूपीसीएल अगर इससे ज्यादा दर पर बिजली खरीदेगा तो उसका पूरा खर्च उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा।

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मसलन, अगर यूपीसीएल किसी महीने 9 रुपये की दर से बिजली खरीदेगा तो 4.28 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से वसूली की जाएगी। हालांकि, नियामक आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 20 प्रतिशत से अधिक की वसूली नहीं की जा सकेगी।

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