समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। सीजनल अफेक्टिव डिसआर्डर (सैड) एक किस्म का डिप्रेशन है, जो हर साल एक ही समय व्यक्ति को अपना शिकार बनाता है। सैड होने पर व्यक्ति न सिर्फ डिप्रेशन के लक्षण प्रदर्शित करता है बल्कि उसे न समझ में आने वाली थकान भी महसूस होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब दिन की रोशनी में व्यक्ति का एक्सपोजर कम हो जाता है तो इस पर जो दिमाग की प्रतिक्रिया होती है, उससे डिप्रेशन उत्पन्न होता है, जिसे सैड कहते हैं। अब धूप की कमी अक्सर मौसम बदलने में होती हीै इसलिए सैड का मानसून से सीधा ताल्लुक है।
सैड के लक्षण – सैड के लक्षण वैसे ही होते हैं जैसे कि डिप्रेशन के जिनमें शामिल हैं। मसलन-मूड में बदलाव, आनन्द की कमी का अहसास, ऊर्जा के स्तरों में कमी, स्लीप पैटर्न में परिवर्तन, एकाग्रता में कठिनाई और सोशलाइजिंग में कम समय व्यतीत करना। अब अगर आपमें इस किस्म के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो आप सैड से ग्रस्त हैं और इसे दूर करने के तरीके ये हैं –
अधिक मैग्नीशियम लें – संतुलित आहार से ये सुनिश्चित हो जाता है कि आपके जिस्म की सभी जरूरतें पूरी हो रही है। इसक बावजूद भी अगर आप यह महसूस कर रहे है कि ऊर्जा की कमी है, थकान है तो इसकी वजह मैग्नीशियम की हल्की कमी हो सकती है। हमारे शरीर को मैग्नीशियम की जरूरत 300 से अधिक बायोरासायनिक क्रियाओं के लिए होती है। इनमें से एक है ग्लूकोज को तोड़कर उसे ऊर्जा में बदलना। एक अध्ययन से यह भी मालूम हुआ है कि जिनके शरीर में मैग्नीशियम की कमी होती है उन्हें रोजमर्रा के जिस्मानी कामों के लिए अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है, जिससे वह थकान व बुझापन महसूस करते हैं। रोजाना की मैग्नीशियम पूर्ति करने के लिए बादाम और काजू खायें।
वॉक पर जायें – आप सोचतें हैं कि थकने के बाद अगर आप वॉक पर जाएंगे या कोई और कड़ी जिस्मानी मशक्कत करेंगे तो आप और अधिक थक जाएंगे। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप गलत सोचते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वॉकिंग जैसी जिस्मानी मशक्कत वास्तव में आपके ऊर्जा स्तर को बढ़ा देगी। एक प्रयोग में यह निष्कर्ष निकला कि 10 मिनट की वॉक न सिर्फ ऊर्जा स्तर को बढ़ा देती है, बल्कि मूड भी बहुत अच्छा कर देती है। इसलिए अगली बार जब आप थकान महसूस करें या उदासी आप पर छा जाए तो बाहर निकलें और वॉक पर चलें जायें।
पावर नैप लें – आज के माहौल में जानकारी की जरूरत से ज्यादा अधिकता हमारे दिमाग को क्षमता से अधिक काम करने पर मजबूर कर देती है और हमारे ऊर्जा स्तर को भी कम कर देती है। बहरहाल, हाल के अध्ययनों से मालूम हुआ है कि 60 मिनट की पावर नैप (गहरी नींद) हमारी याददाश्त को तेज कर देती है और उस तनाव को कम कर देती है, जो रोजमर्रा की गतिविधियों के ओवरलोड से आता है।
तनाव और गुस्सा कम करें- ऊर्जा स्तर में कमी होने की सबसे बड़ी वजह है तनाव। जो चिंताएं आपको घेरे हुए होती हैं, वे बहुत अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल कर लेती हैं, भले ही आपने ज्यादा काम न किया हो पर आपको मानसिक व शारीरिक रूप से थका देती हैं। दबे हुए ऊर्जा स्तर का भी हमारे शरीर पर सही प्रभाव पड़ता हैं। अपने रोजमर्रा के कार्यक्रम में रिलैक्सेशन गतिविधियां शामिल कर लें। साथ ही नियमित वर्कआउट से उन रसायनों को बाहर निकाला जा सकता है जिनसे तनाव और गुस्सा आता है। सीधी सी बात यह है कि जो कुछ आपको रिलैक्स करे उसे जरूर करें ताकि सैड से बचे रहें।
शराब या अन्य नशा छोड़ें- शराब स्वस्थ नींद में हस्तक्षेप करती है। भले ही आप सोने के लिए शराब पीयें या अन्य नशा करें, लेकिन उससे पर्याप्त आराम नहीं मिलता। हकीकत यह है कि सोने से पहले अगर आप एल्कोहल का सेवन नहीं करेंगे तो आप अगली सुबह तरोताजा उठेंगे।
पर्याप्त पानी पिएं – यह भी सुनिश्चित कर लें कि आप रोजाना पर्याप्त पानी पी रहे हैं। प्यास को भूख समझ लेना एक आम गलती है। लोग पाव भाजी या पिज्जा खाते हैं, जबकि उन्हें जरूरत सिर्फ एक गिलास पानी की होती है। कभी-कभी हल्का सा डिहाईड्रेशन भी आपको थकान और कमजोरी महसूसर करा देता है। वर्कआउट के बाद तो पानी पीना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपका जिस्म और अधिक फ्लूइड की मांग करता है।


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