हल्दी में है गुणों का पिटारा

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। हर भारतीय रसोई में पाई जाने वाली हल्दी जहां धार्मिक दृष्टि से शुभ व पवित्र मानी जाती है, वहीं इसके औषधीय गुणों भी अदभुत व अनगिनत हैं। दाल-सब्जी पकाने में इसका प्रयोग पीला रंग देने के अलावा खाने को स्वास्थ्य की दृष्टि से भी किया जाता है। हल्दी की प्रकृति गरम व शुष्क होती है। इसका प्रयोग लोग नीम्बू व हरी मिर्च के साथ अचार बनाने के लिए करते हैं।
आयुर्वेदिक व प्राकृतिक चिकित्सकों द्वारा हल्दी का प्रयोग कई बीमारियों में किया जाता है।। हल्दी में करकुरियम नाम का तत्व पाया जाता है, जिस कारण हल्दी में किसी भी दर्द को खींचने की अदभुत क्षमता होती है व इसी तत्व के कारण यह एक एंटी ऑक्सीडेंट का काम भी करती है। हल्दी का प्रयोग घर पर छोटी-मोटी बीमारियों में किया जा सकता है। हड्डी टूटने अथवा कोई चोट लगने पर गर्म दूध में हल्दी मिला कर पीने की सलाह तो हम अपने बुजुर्गों से सुनते ही आये हैं, इसके अलावा यदि किसी चोट में से खून बह रहा हो तो हल्दी पाउडर के छिड़काव से अतिशीघ्र लाभ मिलता है। किसी घाव की स्थिति में तेल अथवा घी को हल्दी के साथ गरम करके उस पर लगाने से घाव जल्दी भरता है। हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण भरपूर होते हैं। घाव में कीड़े पड़ने की स्थिति में भी हल्दी पाउडर का छिड़काव फायदेमंद रहता है। हल्दी कीड़ों को मारती है। घर में चावल अधिक मात्रा में खरीद लिए हों तो उनमें भी हल्दी की गांठें रख दें तो कीड़ा नहीं लगता।

  1. दातों के दर्द में भी हल्दी व हींग को मिला कर पानी के साथ पीस कर गोली बनाकर दर्द वाले दंत के नीचे दबा दें तो दर्द मिट जायेगा।
  2. यदि मुंह के छालों से परेशान हैं तो पहले गर्म नमक वाले पानी से कुल्ला करें, उसके बाद हल्दी पाउडर व शहद का पेस्ट बनाकर रखें, फिर गरम पानी के कुल्ला करें, दिल में तकरीबन तीन बार करें। दो दिन में छाले ठीक हो जायेंगे।
  3. पेट में गैस का गोला घूमने पर चुटकी भर नमक व हल्दी पाउडर का गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से तत्कालीन आराम मिलता है।
  4. त्वचा रोग, श्वास संबंधी रोगों जैसे खांसी, जुकाम, गला खराब आदि में भी गरम दूध के साथ हल्दी की फंकी लेने से आराम मिलता है। हल्दी की चाय पीने से भी फायदा मिलता है।
  5. चेहरे के दाग-धब्बों, झाइयों आदि में हल्दी, काला तिल व गरम दूध को पीसकर चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ हाती है। चेहरे के अनावश्यक बालों को भी बेसन, हल्दी व कच्चे दूध के उबटन से हटाया जा सकता है।
  6. हाथ- पांव की त्वचा फटने की स्थिति में भी हल्दी व कच्चे दूध का लेप करने से त्वचा मुलायम होती है। पैरों की फटी बिवाईओं में भी हल्दी व तेल के पुल्टिस बना कर उन पर लगाकर पट्टी बांध दें तो तीन रात तक ऐसा करने से पैर की एड़ियां मुलायम होने लगती है।
  7. प्राकृतिक चिकित्सकों द्वारा हल्दी का एनिमा कुछ खास किस्म की मलाशय के रोगियों को दिया जाता है। जोड़ों व घुटनों के एवं गंधरसी अर्थात सायटिका के दर्द में भी हल्दी का प्रयोग लाभकारी होता है।
  8. इस प्रकार हम पाते हैं की हल्दी गुणों की अदभुत खान है, किन्तु नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड अल्टरेनेटिव मेडिसिन्स की रिपोर्ट के अनुसार अधिक हल्दी के लंबे समय तक प्रयोग आपको पेट के कई रेागों से ग्रसित भी कर सकता है, इसलिए हल्दी की प्रयोग एक नियमित मात्रा में एक निश्चित अवधि तक अपने चिकित्सक के परामर्श पर ही करें।
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