समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। अभी भाद्रपद महीना चल रहा है। इस महीने की अमावस्या पर स्नान-दान और पितरों के लिए श्राद्ध करने की परंपरा है। ऐसा करने से पितृ एक साल के लिए तृप्त हो जाते हैं। साथ ही इस दिन स्नान-दान से हर तरह के पाप भी खत्म हो जाते हैं। ये अमावस्या पर्व 27 अगस्त, शनिवार को है। इसलिए इसे शनिश्चरी अमावस्या के रूप में मनाया जाएगा। इस अमावस्या पर भगवान विष्णु, शिवजी, शनिदेव और हनुमानजी की पूजा खासतौर से की जाएगी।
ग्रहों का संयोग: अपनी ही राशि में होंगे चार ग्रह
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि शनिवार को ग्रहों का विशेश संयोग बन रहा है। इस दिन सूर्य, सिंह राशि में, बुध कन्या, गुरु मीन और शनि मकर राशि में रहेगा। इन चार ग्रहों का अपनी-अपनी राशि में होना सुखद संयोग है। साथ ही ये इस साल की आखिरी शनैश्चरी अमावस्या भी है। जानकारों का कहना है कि ऐसे शुभ संयोग में किए गए दान का कई गुना पुण्य फल मिलता है।
शिव और पद्म योग होने से खास रहेगा दिन
डॉ. मिश्र के मुताबिक शनिश्चरी अमावस्या ऐसी तिथि है जिसमें देव आराधना के जरिए सभी परेशानियों का समाधान किया जा सकता है। 27 अगस्त को शनि के नक्षत्र में बृहस्पति मौजूद रहेगा। ऐसा होने से अमावस्या पर स्नान-दान और देव दर्शन का महत्व दुगना हो जाएगा। इसके अलावा शिव और पद्म नाम के दो शुभ योगों का भी संयोग बन रहा है। इस दिन शनि, शिवजी और हनुमान जी की पूजा करें तो कर्ज से मुक्ति, सेहत लाभ और न्याय के क्षेत्र में जीत मिल सकती है।
कर सकते हैं ये शुभ काम
इस पर्व पर सूर्याेदय से पहले उठकर तीर्थ या पवित्र नदियों के पानी से नहाकर पीपल पूजा करने का महत्व बताया है। इस दिन चांदी या तांबे के लोटे में पानी भरकर उसमें कच्चा दूध मिलाना चाहिए। तिल और चावल भी डालने चाहिए। फिर इस लोटे का पूरा पानी पीपल की जड़ में चढ़ाकर पितरों को प्रणाम करना चाहिए। इसके बाद पेड़ की परिक्रमा करें और घी का दीपक लगाने के बाद प्रणाम कर के लौट आएं।



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