समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। इस पर्व की रौनक मथुरा व वृंदावन में देखने लायक होती है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव को मनाने के लिए लोग घरों में साज-सज्जा करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का विधिवत श्रृंगार करके उनकी आधी रात को पूजा करते हैं। हर साल जन्माष्टमी का त्योहार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल जन्माष्टमी 16 अगस्त, शनिवार को है। मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन कुछ कार्यों को करने से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है, जबकि कुछ कार्यों को करना वर्जित माना गया है। जानें जन्माष्टमी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
जन्माष्टमी के दिन क्या करना चाहिए-
- जन्माष्टमी के दिन सुबह सूर्याेदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
- इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और दिन में सोने से बचना चाहिए।
- इस दिन फलाहार व्रत करने वाले व्रती फल, साबूदाना, दूध, दही आदि का सेवन कर सकते हैं।
- निर्जला जन्माष्टमी का व्रत करने वालों को किसी भी तरह के अन्न या जल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- भगवान श्रीकृष्ण की सुबह व शाम को पूजा करनी चाहिए।
- रात 12 बजे के बाद भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद ही व्रत पारण करना चाहिए।
जन्माष्टमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए
- जन्माष्टमी के दिन काले रंग के वस्त्रों को नहीं पहनना चाहिए और न ही पूजा में काले रंग की वस्तु प्रयोग करनी चाहिए।
- व्रत के दौरान अन्न व नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
- वाद-विवादों से दूर रहना चाहिए और न ही किसी को अपशब्द बोलने चाहिए।
- मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।

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