दुर्घटनाओं का खतरा और गंभीरता सीधे तौर पर वाहनों की गति के आनुपातिक होती है: डॉ. संजय

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समाचार सच, देहरादून। विश्व समरण दिवस के अवसर पर संजय आर्थाेपीडिक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर एवं सेवा सोसाइटी ने जाखन राजपुर रोड में एक निःशुल्क जन जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री मुख्तार मोहशिन आईपीएस, डीआईजी/निदेशक यातायात, उत्तराखण्ड, गेस्ट ऑफ ऑनर पद्म भूषण डॉ. अनिल जोशी अध्यक्ष हेस्को, पूर्व कुलपति डॉ. सुधा रानी पाण्डेय, विशेष अतिथि श्रीमती रश्मि पंत, श्री एच. एस. बरगली और देहरादून के डाइलेक्टोलॉजिस्ट डॉ आशुतोष शर्मा, वक्ता पद्मश्री डॉ. बी. के. एस. संजय ने किया। डॉ आर. बी. कालिया एम्स ऋषिकेश, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुजाता संजय, हड्डी रोग एवं रीढ़ सर्जन डॉ गौरव संजय, डॉ प्रतीक संजय, समाजसेवी श्री योगेश अग्रवाल व अन्य ने सड़क यातायात पीड़ितों के लिए मोमबत्तियां जलाई एवं श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
सड़क यातायात पीड़ितों के लिए विश्व स्मरण दिवस का उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए एक मंच प्रदान करना है ताकि सड़कों पर मारे गए और गंभीर रूप से घायल हुए सभी लोगों को याद किया जा सके। पद्मश्री डॉ. बी.के.एस संजय ने बताया कि उनके द्वारा किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि 90 फीसदी दुर्घटनाएं चालक की लापरवाही के कारण होती हैं। वाहन की गति को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक चालक होता है। तेज गति से चलने वाले वाहनों से दुर्घटनाओं की संभावना अधिक होती है और दुर्घटनाओं का खतरा और गंभीरता सीधे तौर पर वाहनों की गति के आनुपातिक होती है। जितनी ज्यादा गति, उतनी ज्यादा क्षति।
इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड होल्डर, ऑर्थाेपीडिक सर्जन डॉ गौरव संजय ने इस बात पर जोर दिया कि रात के समय होने वाली दुर्घटनाएं भी घातक होती हैं क्योंकि वाहन चालकों के लिए शराब का सेवन करके अपनी थकान का प्रबंधन करना भारत में एक आम प्रथा है। दुर्घटना से बचने के लिए प्रतिक्रिया समय आमतौर पर एक सेकंड का अंश होता है। लेकिन शराब पीने के बाद आमतौर पर उस देरी की मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकती है। उनकी राय में नींद की कमी और शराब का प्रभाव भारत में आरटीए के मुख्य कारण हैं।
आम जनता को सड़क दुर्घटनाओं के परिणामों और सड़क सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए एक राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए। इस कार्य का एक छोटा सा हिस्सा बनने के लिए डॉ प्रतीक संजय ने बताया कि उनका संगठन 2001 से इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि सड़क दुर्घटनाओं के दौरान एक भी दुर्घटना आने वाली पीढ़ी के लिए घायल व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और वित्तीय स्थिति को बदल सकती है।
सड़क दुर्घटनाओं ने एक महामारी का रूप ले लिया है, हम सभी को इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता फैलानी चाहिए। सीमित संसाधनों के होते हुए भी हमारी संस्था भी अपने ढ़ंग से जागरूकता फैला रही है। जनता को इन यातायात नियमों को सीखना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए और सरकार को चाहिए कि वे यातायात नियमों को सिखाएं और इन सड़क यातायात त्रासदियों को रोकने के लिए इन्हें सख्ती से लागू करें।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी निदेशक मुख्तार मोहशिन ने कहा कि सरकार ने जो समारटियन प्राजेक्ट चला रखा है जिससे दुर्घटना पीड़ित व्यक्ति की यदि कोई भी मदद करता है तो उसको किसी तरह की कानूनी पचड़े में नही फंसाया जा सकता है बल्कि उसको सरकार पुरष्कृत भी करती है। डॉ. आर. बी. कालिया ने अच्छे ढ़ंग से संक्षिप्त शब्दों में बताया कि दुर्घटना होने पर राह चलते व्यक्तियों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। पद्म भूषण डॉ. अनिल जोशी ने कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की और डॉ. संजय और उनकी संस्था के कर्मचारियों के उज्जवल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि भूतपूर्व कुलपति ने कहा कि आजकल वनयुवकों को तो यातायात के नियम न मानने की एक प्रथा सी चल रही है। डॉ. सुजाता संजय आये हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया और धन्यवाद दिया। चौहान, अनिल कुमार रावत, महेन्द्र नेगी, आनंद बल्लभ पाण्डे, श्रीमती पूजा खुल्बे, आनन्द बल्लभ उप्रेती, श्रीमती ज्योति बड़ौला, श्रीमती कल्पना भण्डारी, चंदन मेहरा, खेमसिंह नेगी, राकेश गंगोला, नवनीत जोशी, गिरजा शंकर पाण्डे, हरिन्दर बाफिला, हिमांशु तड़ागी आदि उपस्थित थे।

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