समाचार सच, हल्द्वानी। सिपाही कमलजीत सिंह का जन्म श्री सरवन सिंह के यहाँ ऊधम सिंह नगर के खटीमा तहसील में वर्ष 1982 में हुआ। कमलजीत सिंह ने वर्ष 2001 में पालीगंज से कक्षा 10वी अच्छे अंकों के साथ उतीर्ण की लेकिन पारिवारिक स्थिति सही न होने के कारण आगे की शिक्षा जारी नहीं रख पाये तो माता-पिता के साथ कृषि कार्य में हाथ बटाँने लगे। मेजर बी एस रौतेला ने बताया कि कमलजीत सिंह के मन में और कुछ अलग से करने का जज्बा था इसलिए वे माता-पिता के साथ खेती के काम में भी बहुत मेहनत करते थे।
वर्ष 2002 में सिख रेजिमेण्ट केन्द्र में भर्ती हुई। कमलजीत ने भी अपने माता-पिता से आज्ञा ली और अपने एक रिश्तेदार के साथ रामगढ़ चले गये। वहां जाते ही पहले प्रयास में ही उनका सेना के लिए चयन हो गया। रामगढ़ में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने पर उन्हें सिख रेजिमेण्ट की पुरानी और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली पल्टन 2 सिख में भेज दिया गया। कुछ ही समय में उन्होंने पल्टन में अपनी छवि एक ईमानदार, मेहनती और अनुशासित सैनिक के रुप में बनाई। कुछ समय के बाद उन्हें 6 राष्ट्रीय राईफल्स में तैनाती दी गई । दिनांक 26 मई 2005 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में भारत माता के इस लाल ने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
जवान पुत्र के बलिदान के बाद पिता सरवन सिंह अवसाद में आ गये और हर समय उदास रहने लगे। उन्हें अपने होनहार पुत्र से बहुत आशाएँ थी। वे कहते कि कमलजीत की शादी की बात कर रहे थे तो कमलजीत कहता था कि पिता जी पहले पक्का मकान बना लेते हैं उसके बाद शादी करेंगें। घर बनाने के लिए वे समय-समय पर अपने पिता को पैसा भेजते रहते थे और बिलकुल भी फ़िजूल खर्च नहीं करते थे।
कमलजीत अपने छोटे भाई पवनदीप से कहते थे कि मैं तो पैसों की कमी के कारण नहीं पढ़ पाया लेकिन तुझे भगवान ने बड़ा भाई दिया है। तुम अच्छे से शिक्षा ग्रहण करो और उच्च शिक्षा हासिल कर कुछ ऐसा करो कि माता-पिता को अपने बेटों पर गर्व हो। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था जिस कारण जैसा सोचा था, जो अरमान थे, कुछ भी नहीं हो पाया।
पवनदीप बताते हैं कि भाई के बलिदान के बाद सब अरमान ही बिखर गये हैं। कुछ भी करने का मन नहीं करता। अभी भी परिवार उनके दुख से उभर नहीं पाया है। सरकार द्वारा देय सारी सुविधाएं और पेंशन सही मिल रही है। यद्यपि मेरा भाई मातृभूमि के काम आया इस पर पूरे परिवार को गर्व हैं लेकिन उनकी कमी का बहुत एहसास रहता है।
समाचार सच परिवार सिपाही कमलजीत सिंह की शहादत को सलाम करता है और उनको नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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