जयकारों से गूंजा अल्मोड़ा, भव्य शोभायात्रा के साथ गोल्ज्यू महोत्सव का आगाज

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सात दिन तक मल्ला महल में दिखेगी उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक, स्थानीय कलाकारों को मिलेगा प्रतिभा प्रदर्शन का मंच

समाचार सच, अल्मोड़ा डेस्क।
उत्तराखंड की धार्मिक आस्था और समृद्ध लोक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में गुरुवार को गोल्ज्यू महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा के साथ शुरू हुए इस महोत्सव में गोल्ज्यू महाराज के जयकारों से नगर का माहौल भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा में स्थानीय कलाकारों के साथ बाहरी क्षेत्रों से पहुंचे सांस्कृतिक दलों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की। महोत्सव के आगाज के साथ ही अल्मोड़ा में सांस्कृतिक उत्सव की रौनक दिखाई देने लगी।

महोत्सव का आयोजन 28 अक्टूबर तक किया जाएगा। इस दौरान मल्ला महल विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहेगा। यहां उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों की लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की विविधतापूर्ण विरासत को सामने लाया जाएगा। स्थानीय प्रतिभाओं के साथ अन्य क्षेत्रों से आए सांस्कृतिक दल भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को लोक संस्कृति के विभिन्न रंगों से परिचित कराएंगे।

लोक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर
गोल्ज्यू महोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के मंच के रूप में भी देखा जा रहा है। आयोजन के माध्यम से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, पारंपरिक मान्यताओं और लोक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और व्यापक पहचान हासिल करने का अवसर मिलेगा।

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महोत्सव के आयोजक प्रकाश बिष्ट ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को युवाओं से जोड़कर आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और उत्तराखंड की लोक संस्कृति को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के साथ उसे नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों की सहभागिता से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है और लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

सात दिनों तक चलने वाला गोल्ज्यू महोत्सव धार्मिक आस्था, लोक कला और सांस्कृतिक विरासत के संगम के रूप में अल्मोड़ा की पहचान को सामने लाएगा।

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