समाचार सच. अध्यात्म डेस्क। एक ऐसा ही मन्दिर ‘कालिया नाग’ का कुमाऊँ की पुंगरांव पट्टी में है। मन्दिर तक पहुंचने का रास्ता अतिशय विकट है। एक स्थानीय घास ‘बाबिला’ को पकड़कर 40-50 मीटर की सपाट चढ़ाई चढ़कर मन्दिर तक पहुंचा जा सकता है। स्त्रियों का इस मन्दिर में आना वर्जित है। जनश्रुति के अनुसार स्त्रियों द्वारा धोए कपड़े पहनकर जाना भी वर्जित है। लोक विश्वास के अनुसार इस पर्वत के ऊपर गरूड़ कभी नहीं उड़ता है। मल-मूत्र कर यदि मन्दिर परिसर को कोई अपवित्र कर देता है तो अनेक नाग धरती से बाहर आ जाते हैं। स्थान शुद्धि के बाद फिर अन्दर चले जाते हैं। भागवत (5-24-29) के अनुसार ‘कालिया’ को क्रोधवश – वर्ग का सर्प राज माना जाता है।

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