कुंडली में बृहस्पति की दशा पर जीवन मिलने वाले शुभ और अशुभ फल

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। जीवन में गुरु के महत्व से हम सभी परिचित हैं। माता-पिता के बाद गुरु को ही भगवान का दर्जा दिया गया है। गुरु ज्ञान का द्वार होता है और ज्ञान ही हमारे जीवन में प्रकाश लाता है। सौर्य मंडल में भी सूर्य के बाद गुरु सबसे बड़ा ग्रह माना गया है। कुंडली में भी गुरु (बृहस्पति) की दशा पर जीवन में मिलने वाले शुभ और अशुभ फल निर्भर करते हैं।
इसलिए कुंडली में गुरु का मजबूत होना बहुत जरूरी है। कई बार लोगों को गुरु के कमजोर होने पर जीवन में कष्ट भी उठाने पड़ते हैं, ऐसे में इसके कुछ उपायों को अपनाया जाए तो कुंडली में गुरु की स्थिति को मजबूत बनाया जा सकता है।
आज हम गुरु को मजबूत बनाने के कुछ आसान उपाय उज्जैन के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा से जानेंगे।
बृहस्पति के कमजोर होने के संकेत जानें-
-अगर धन प्राप्ति में बाधा आने लगे और किसी का सहयोग भी प्राप्त न हो, तो समझ जाएं कि कुंडली में बृहस्पति कमजोर है।
-विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करने में मुश्किलों का सामना करना पड़े और गुरु का सहयोग न मिले, तो यह दशा बताती है कि कुंडली में बृहस्पति कमजोर है।
-अगर खाना पचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़े और कोई गंभीर रोग हो जाए , तो यह दशा भी कुंडली में बृहस्पति के कमजोर होने की ओर इशारा करती है।
-संतान से दुख प्राप्त हो और वह आपकी बात न सुने तो यह भी कुंडली में बृहस्पति के कमजोर होने का एक संकेत हो सकता है।
-कुंडली में बृहस्पति के कमजोर होने पर व्यक्ति अपने संस्कारों को भूल कर बड़ों का अपमान करने लगता है। इस स्थिति में लोग ऐसे व्यक्ति से दूरियां बनाने लग जाते हैं।
कुंडली में बृहस्पति को मजबूत बनाने के उपाय जानें-
पंडित एवं ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा कुंडली में बृहस्पति को मजबूत बनाने के कुछ सरल उपाय बता रहे हैं, आप उन्हें अपना कर लाभ उठा सकते हैं-
1.पुखराज का रत्न पहने
पंडित जी कहते हैं, अगर बृहस्पति कमजोर है तो आपको पुखराज का रत्न (एक्सपर्ट से जानें पुखराज के फायदे) पहनना चाहिए। मगर इससे पहले आपको किसी पंडित की मदद से यह जान लेना चाहिए कि आपकी कुंडली में कितने डिग्री का गुरु है। दरअसल, गुरु की डिग्री के हिसाब से पुखराज रत्न का कैरेट निर्भर करता है। इस विषय में पंडित जी जानकारी देते हैं, श्मान लो कि कुंडली में गुरु की डिग्री 5 है, तो पुखराज 5-7 कैरेट का होगा। इतना ही नहीं, पुखराज रत्न को धारण करने से पूर्व यह भी देखा जाएगा कि गुरु की कंडीशन क्या है? अगर गुरु उच्च का है और मित्र राशि (मेष, कर्क में उच्च का गुरु, सिंह, वृश्चिक) या अपनी राशि (धनु, मीन) में है, तो ही पुखराज पहना जा सकता है। वहीं गुरु अगर मृत्यु और रोग के स्घ्थान पर हो तो पुखराज नहीं पहनना चाहिए। कुंडली में गुरु आय, नौकरी, संतान और विवाह के स्थान पर है तो उसकी डिग्री जब कम होगी, तब ही पुखराज पहना जा सकता है। पंडित जी कहते हैं, श्गुरु के वक्री होने पर अलग उपाय होते हैं। इसके लिए आपको पंडित को अपनी कुंडली दिखानी होगी।

  1. हल्दी की गांठ का उपाय
    पंडित जी कहते हैं कि अगर आपको पुखराज रत्न धारण नहीं करना है, तो आप हल्दी की गांठ भी हाथ में बांध सकते हैं। पंडित जी बताते हैं, श्एक पीले कपड़े में हल्दी की गांठ को बांध कर इसे हाथ में बांध लें। मगर इसे दाएं हाथ में बांधना है या बाएं में, इसके लिए कुंडली में बृहस्पति की स्थिति देखी जाती है। इसके लिए पंडित जी सलाह देते हैं कि आपको एक बार अपनी कुंडली किसी अच्छे ज्योतिष से दिखवा लेनी चाहिए।
  2. केले की जड़ का पूजन करें
    गुरुवार के दिन आपको केले की जड़ का पूजन भी जरूर करना चाहिए। यह पूजन आप केसर, चने की दाल और हल्दी से कर सकते हैं। इतना ही नहीं, पंडित जी कहते हैं कि हर गुरुवार नियमित रूप से सुबह के समय बृहस्पति के बीज मंत्र श्ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सरू गुरुवे नमरू।श् का जाप करना चाहिए। आपके पास जितना समय हो उसके अनुसार आप इस बीज मंत्र की 3,5 या 7 माला कर सकते हैं।
  3. पीले कपड़े और मिठाई खाएं
    कुंडली में बृहस्पति को मजबूत बनाने का एक सरल उपाय यह भी है कि आप गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्र (गुरुवार को पीले कपड़े पहनने के फायदे) धारण करें और पीले रंग की मिठाई जरूर खाएं। इतना ही नहीं, आप यदि स्नान करने के पानी में हल्दी डाल कर उसका इस्तेमाल करते हैं तो यह भी लाभकारी होता है।
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