कपकोट से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित मंदिर में आग लगने से क्षेत्र में शोक, शॉर्ट सर्किट या दीपक की लौ से आग लगने की आशंका, कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं
समाचार सच, बागेश्वर।
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील के दूरस्थ बदियाकोट गांव में शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की सुबह मां भगवती मंदिर में भीषण आग लगने की घटना सामने आई। आग इतनी तेजी से फैली कि लकड़ी से निर्मित मंदिर की ऐतिहासिक संरचना को भारी नुकसान पहुंचने की सूचना है। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों में शोक की लहर है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बदियाकोट स्थित मां भगवती मंदिर कपकोट से लगभग 50 किलोमीटर दूर दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में स्थित है। मंदिर स्थानीय लोगों की गहरी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ क्षेत्र की पारंपरिक स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। मंदिर में लकड़ी पर की गई आकर्षक नक्काशी इसकी विशिष्ट पहचान थी।
पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है मंदिर
स्थानीय पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां आदि शक्ति ने इसी क्षेत्र में दैत्य निशुंभ का वध किया था। इसी मान्यता के चलते इस स्थान को वधकोट के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में नंदाष्टमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, जागर और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इन धार्मिक आयोजनों में क्षेत्र के श्रद्धालुओं की विशेष आस्था रहती है।
दुर्गम क्षेत्र होने से आग बुझाने में आई चुनौती
मंदिर में आग लगने की सूचना शुक्रवार सुबह मिली। बताया जा रहा है कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अग्निशमन दल को तत्काल मौके तक पहुंचने में कठिनाई हुई। लकड़ी से निर्मित मंदिर होने के कारण आग तेजी से फैल गई और संरचना को काफी क्षति पहुंचने की सूचना है। घटना से संबंधित कुछ तस्वीरें ड्रोन के माध्यम से भी प्राप्त हुई हैं।
शॉर्ट सर्किट या दीपक से आग लगने की आशंका
स्थानीय निवासी आन सिंह के अनुसार, मंदिर में बिजली की व्यवस्था थी और पूजा-अर्चना के दौरान दीपक भी जलाए जाते थे। ऐसे में शॉर्ट सर्किट अथवा दीपक की लौ से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना की जांच कराए जाने की मांग भी उठ रही है।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख कपकोट गोविंद सिंह दानू ने मंदिर में आग लगने की घटना पर दुख जताया और शासन-प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मां भगवती का आशीर्वाद सभी पर बना रहे, लेकिन इस घटना ने क्षेत्र के लोगों को गहरे दुख में डाल दिया है।
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को पहुंची चोट
नवरात्रि के पावन दिनों में मंदिर में आग लगने की इस घटना से श्रद्धालु और ग्रामीण व्यथित हैं। लकड़ी की पारंपरिक संरचना और नक्काशी के लिए पहचाने जाने वाले इस मंदिर को हुए नुकसान ने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल मंदिर को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन और आग लगने के कारणों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी। स्थानीय लोग मंदिर की स्थिति का आकलन करने, घटना की निष्पक्ष जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

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