Chacha

आंतों के गुड फ्लोरा को बढ़ावा देती है छाछ

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। आयुर्वेद ने मानव शरीर को स्वस्थ रखने के लिए मौसम के अनुसार अनेक पेय और खाद्य पदार्थों की विस्तृत श्रृंखला बना रखी ली। इन्हें मौसम के अनुसार ही लेने का आग्रह किया गया है। दही से बनी ताजी छाछ आंतों में रहने वाले गुड़ बैक्टीरिया को बढ़ावा देती है।
आयुर्वेद मानता है कि प्रकृति के विरूद्ध आहार – विहार करने से मानव शरीर में रोग उत्पन्न होते हैं। केवल आहार ही नहीं औषधियां भी मौसम के अनुसार ही कार्य करती है। इसलिए ऋतुओं के अनुसार आहार एवं औषधियों का सेवन करने को ही पथ्य कहा जाता है। यह केवल आयुर्वेद ही बताता है कि किस ऋतु में ओर किस रोग में क्या खाएं और क्या नहीं।
सर्दियों के मौसम में गर्म खाद्य पदार्थों का सेवन करने और ग्रीष्म ऋतु में ठंडे पदार्थों का सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहता है। अक्सर छाछ की ठंडी तासीर का मान लिया जाता है लेकिन आयुर्वेद के मथित, उदश्रित, छच्छिका आदि नामों से जाना जाता है। छाछ, मट्ठा और बटर मिल्क भी प्रचलित नाम हैं। इसे टीवी, व्रण, भ्रम, मूर्छा तथा रक्तस्राव होने की स्थिति मे ंनही पीना चाहिए। इसी तरह शरीर में दाह होने पर अथवा दुर्बल व्यक्ति को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
इतना विपरीत आहार न करें – – छाछ के साथ चांवल मिलाकर खाने और बाद में दही पीने से शरीर मोटा हो जाता है।
-दूध चावल खाने के बाद यदि कोई दही भी ख लेता है तो उसके शरीर पर विष के समान असर होता है।
-दही या छाछ लेने के बाद दूध पीना विष के समान है।
याद रखें कि गर्मियों में छाछ पीने से दाह उत्पन्न होती है ऐसा आयुर्वेद का मानना है। इस मौसम के अलावा अन्य ऋतुओं में छाछ हर रोग में लाभ पहुंचाने में सक्षम हैं।
किन रोगों में छाछ लाभदायक –
-डीसेंट्री यानी दस्त लगने में, डायरिया, एनोरेक्सिया, ओबीसिटी यानी मोटापा, ब्लीडिंग पाइल्स को छोड़कर सभी तरह के बावासीर में छाछ लिया जा सकता है।
-अधिक घी वाला भोजन करने के बाद पैदा हुए अर्जीण को शांत करने के लिए छाछ पीना श्रेष्ठ माना गया है।
-वात रोगों के इलाज में छाछ को सेंधा नमक और सौंठ मिलाकर पीना चाहिए।
-पित्त रोगों के इलाज के लिए छाछ में मीठा मिलाकर पिया जा सकता है।

  • कफ से संबंधित रोगों के इलाज के लिए छाछ में सौंठ, काली मिर्च, पीपली मिलाकर पिएं।
    -हींग और घी में भूनी हुई छाछ में सेंधा नमक मिलाकर पीने से भोजन में रूचि उत्पन्न होती है। इससे शरीर को बल मिलता है और बवासीर तथा अतिसार के रोग खत्म होते हैं।
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