चैत्र मास 2026: 4 मार्च से शुरू होगा चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, राम नवमी और हनुमान जन्मोत्सव जैसे बड़े व्रत-पर्व

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। 4 मार्च से चैत्र मास का कृष्ण पक्ष शुरू हो रहा है और इस माह के शुक्ल पक्ष की शुरुआत के साथ हिन्दी पंचांग का नया साल शुरू होता है। ये महीना 2 अप्रैल तक रहेगा। इसी महीने में चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, राम नवमी भी मनाई जाती है। अब ठंड खत्म हो जाएगी और गर्मी बढ़ेगी, इस वजह से चौत्र माह में खान-पान और जीवन शैली कुछ ऐसे बदलाव करने चाहिए, जिनसे ऋतु परिवर्तन के समय होने वाली मौसमी बीमारियों से बचा जा सके। चैत्र मास में सुबह जल्दी उठना चाहिए, स्नान के बाद सूर्य पूजा के साथ दिन की शुरुआत करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, चैत्र मास में शीतला माता की पूजा का व्रत-पर्व शीतला सप्तमी (10 मार्च) और अष्टमी (11 मार्च) को है। इस व्रत में ठंडा खाना खाने की परंपरा है। जो लोग ये व्रत करते हैं, वे एक दिन पहले पकाया हुआ खाना खाते हैं। अभी शीत ऋतु के जाने का और ग्रीष्म ऋतु के आने का समय है। इस दौरान मौसमी बीमारियां होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। मान्यता है कि शीतला माता का ये व्रत हमें मौसमी बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है।

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चैत्र की अमावस्या 18 मार्च को रहेगी। इस दिन पितरों के लिए धूप-ध्यान करना चाहिए। पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। 19 तारीख से नवसंवत् 2083 शुरू होगा। इसी दिन से चौत्र मास की नवरात्रि भी शुरू हो जाएगी। इन दिनों में देवी मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन दिनों में मंत्र जप और ध्यान भी जरूर करना चाहिए। चैत्र नवरात्रि में भक्त व्रत करते हैं, अन्न का त्याग करते हैं। व्रत करने वाले भक्त फल, फलों के रस, दूध का सेवन करते हैं। ऐसा करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर को जरूरी ऊर्जा भी मिलती रहती है। इन दिनों में किए गए व्रत-उपवास से पाचन संबंधी कई बीमारियों की रोकथाम होती है। आयुर्वेद में बीमारियों को ठीक करने की एक विधि है लंघन, व्रत-उपवास लंघन विधि का ही एक अंग है। इस विधि से पेट से जुड़ी कई परेशानियां ठीक की जा सकती हैं।

राम नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान राम के बाल स्वरूप की पूजा खास तौर पर की जाती है। पूजा में रामायण और श्रीराम से जुड़े प्रसंगों का पाठ करना चाहिए। किसी संत से रामकथा भी सुन सकते हैं। इसके बाद 2 अप्रैल को चैत्र मास की पूर्णिमा है, इस दिन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। हनुमान जी की पूजा में सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

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इन तीज-त्योहारों के अलावा चैत्र मास में दो चतुर्थियां 6 और 22 मार्च को रहेंगी, दो एकादशियां 15 और 29 मार्च को रहेंगी। चतुर्थी पर गणेश जी और एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करते हैं।

चैत्र मास की परंपराएं
नीम का सेवन

चैत्र की शुरुआत में नीम की कोमल पत्तियों का सेवन करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से रक्त शुद्धि होती है और त्वचा को लाभ मिलते हैं, लेकिन नीम का सेवन किसी वैद्य से परामर्श के बाद ही करना चाहिए।
खान-पान में बदलाव
चैत्र मास में भारी, गरिष्ठ और बहुत अधिक मीठे भोजन से परहेज करना चाहिए। इस महीने में हल्का और सुपाच्य भोजन (जैसे मूंग की दाल, दलिया) बेहतर है, इन चीजों से सेहत को लाभ मिलते हैं, पाचन संबंधी कई बीमारियां दूर रहती हैं।

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