समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और विशेष पर्व है। ये पर्व हर साल चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि के दिन शुरू होता है और नौ दिनों तक चलता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। जिसका समापन 27 मार्च को होगा। इस दिन राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। चैत्र नवरात्रि में नौ दिन माता के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही व्रत किया जाता है।
नवरात्रि के दौरान किया गया पूजा-पाठ और व्रत बहुत पुण्यदायी होता है। माना जाता है कि इस दौरान माता दुर्गा धरती लोक पर आती हैं और भक्तों के कष्टों को दूर करती हैं। नवरात्रि के नियम बड़े कठोर होते है। इस दौरान बहुत सी बातों का ध्यान रखा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि चैत्र में क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए?
चैत्र नवरात्रि में क्या करें?
चैत्र नवरात्रि के समय दिन की शुरुआत स्नान से करें। फिर पूजा स्थल की सफाई करें। पहले दिन कलश स्थापना करें। इसके बाद विधि-विधान से पूजा करें। सात्विक भोग लगाएं। मंत्रों का जाप करें। आरती करें। नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक भव्य स्वरूप की पूजा करें। व्रत के दौरान फल, दूध, पनीर, मखाना, सेंधा नमक, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा और साबुदाना खाएं।
नवरात्रि के नौ दिनों तक घर की सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करें। कन्याओं को भोग अर्पित करें।
चैत्र नवरात्रि में क्या नहीं करें?
नवरात्रि के दौरान बाल, दाढ़ी, मूंछ या नाखून नहीं काटें। खाने में सरसों के तेल और तिल के उपयोग से बचें. अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को खाली छोड़कर बाहर न जाएं। मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें। तंबाकू का सेवन इस समय न करें. किसी पर क्रोध न करें. किसी को भी अपशब्द न बोलें।



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