आम लोगों की जेब पर भारी पड़ी कोरोना

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समाचार सच, हल्द्वानी । कोरोना से बचाव के लिए नैनीताल सहित प्रदेश के अन्य 12 जिलों में लॉकडाउन के एलान और जनता कर्फ्यू के चलते पिछले 24 घण्टों से घरों में रह रहे लोग सोमवार सुबह आवश्यक सामानांें की खरीदारी के लिए दुकानों पर उमड़ पड़े।

कोरोना की सबसे ज्यादा मार गरीब मजदूर तबके पर पड़ी है। कल जनता कर्फ्यू के चलते उन्हें कही भी काम नहीं मिला और आज भी लॉकडाउन के चलते उन्हें काम मिलने वाले तमाम स्थानों से निराश होकर लौटना पड़ा। इन्हीं जगहों पर सुबह-सुबह बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में पहुँचतें है।

रविवार को जनता कर्फ्यू के चलते बाहर से आए काफी लोग हल्द्वानी शहर में रुके हुए थे। उन्हें नैनीताल, ऊधमसिंह नगर तथा आसपास के दूसरे जिलों में अपने गंतव्य स्थानों तक जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला। सोमवार सुबह भी बहुत कम बसें तथा गाड़ियाँ सड़कों पर दिखी। लेकिन जो भी है उनमें काफी भीड़ थी। लोग किसी भी तरह अपने-अपने घरों को पहुँचना चाहतें थे।

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हल्द्वानी मेन बाजार में सुबह सात बजते ही भीड़-भाड़ का ऐसा दृश्य देखनें को मिला जैसे रोज 1-2 बजे के बाद होता था। वैसे लॉकडाउन के चलते लगभग सभी इलाको में करीब 50 प्रतिशत दुकानें बंद है और सिर्फ आवश्यक चीजों की दुकानें ही खुली है। और वो भी 2 बजे बाद पूर्ण रूप से बंद ही दिखी। वही लॉकडाउन के बीच मेडिकल स्टोर पर काफी भीड़ दिखाई दे रही है। मास्क और सेनेटाइजर के भले ही सरकार द्वारा रेट निर्धारित कर दिए गए है। पर फिर भी कुछ विक्रेताओं द्वारा इन्हें मुंह मांगे दामों पर जनता को बेची जाने की सूचना है। एक तरफ जहां प्रशासन जनता कर्फ्यू के अन्तर्गत सोशल डिस्टेंसिग को लेकर जनता को जागरूक करती पायी गयी। वही दूसरी तरफ जनता द्वारा इसे नजरअदांज करता पाया गया।

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मजदूरों की भी लो सुध…
मेरी नजर में जनता कर्फ्यू कोरोना जैसी महामारी को अंशतः विराम देने के लिए एक सर्वोत्तम उपाय है जिसको सभी राज्य सरकारों द्वारा अपनाया जा रहा है। वही यदि हम देश के उस गरीब तबके व दैनिक मजदूर की बात करे तो यह गलत नहीं होगा क्योंकि जो अपनी और अपने परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रोज भूख-प्यास सहन करके दो पैसे जोड़ता है। ताकि उसके परिवार को प्रतिदिन दो वक्त की रोटी नसीब हो सके। अब उन्हें कुछ दिनों तक शायद इसी आश में रहना पडे़गा कि कब ये कर्फ्यू हटे और वह सब फिर से अपने-अपने काम पर जा सके। इस समय इनकी लाचारी का हल सरकार के पास तो शायद नहीं है।

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