शवयात्रा और अर्थी भी करती है इच्छाएं पूरी, दिखने पर करें ये काम

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। जो जीव इस धरती पर आया है, उसे एक दिन यहां से जाना है। यह प्रकृति का अटल नियम है जैसे पानी में बुलबुला पैदा होता है और उसी में समा जाता है। इतिहास साक्षी है बड़े-बड़े महारथी और तपस्वी हुए हैं, जिन्होंने मृत्यु पर विजय पाने का प्रयास किया लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाया।

भगवत गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं, मृत्यु एक ऐसा सत्य है, जिसे टाला नहीं जा सकता। जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है।
मृत्यु उपरांत रिश्तेदार और परिजन मृत को अंतिम विदाई देने के लिए जब श्मशान भूमि लेकर जाते हैं तो उसे शवयात्रा कहा जाता है। क्या आप जानते हैं शवयात्रा और अर्थी भी करती है इच्छाएं पूरी आईए जानें कैसे…

  • जब भी कोई शव यात्रा अथवा अर्थी दिखे तो उसे दोनों हाथ जोड़कर, सिर झुका कर प्रणाम करें और मुंह से शिव-शिव का जाप करें। इस संदर्भ में शास्त्र कहते हैं, जो मृतात्मा संसार छोड़ कर जा रही होती है वह अभिवादन करने वाले व्यक्ति के तन-मन से जुड़े सभी संताप हर कर अपने साथ ले जाती है।
  • मनुस्मृति में कहा गया है, शव यात्रा यम के द्वार तक ले जाते समय ध्यान रखें रास्ते में गांव अवश्य आए।
  • शव यात्रा में जाते हुए संसारिक बाते करने की अपेक्षा भगवत नाम सिमरण करें।
  • मृत आत्मा के लिए भजन करें।
  • ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शवयात्रा देखना सुखद एवं मंगलमय भविष्य का सूचक है। माना जाता है की शव यात्रा को देखने से अधूरे काम पूरे होने की संभावनाएं बनने लगती हैं, दुखों का नाश और सुखी जीवन का आगाज होता है।
  • अर्थी को कंधा देने से यज्ञ के समान पुण्य लाभ होता है।
  • ब्राह्मण की अर्थी को कंधा देने से व्यक्ति जितने कदम चलता है, उसे उतने यज्ञ का लाभ मिलता है। साधारण जल में डुबकी लगाने से पवित्र हो जाता है।
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