शिक्षा निदेशालय विवाद से उत्तराखंड की बोर्ड परीक्षाओं पर संकट, शिक्षकों ने दी बहिष्कार की चेतावनी

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प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मारपीट मामला

समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था इस समय गंभीर दबाव में दिखाई दे रही है। जहां लाखों छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे थे, वहीं एक राजनीतिक विवाद ने परीक्षा संचालन पर ही अनिश्चितता के बादल खड़े कर दिए हैं। विवाद उमेश शर्मा काऊ पर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक से कथित मारपीट के आरोपों से जुड़ा है, जिसके बाद प्रदेशभर के शिक्षक आक्रोशित हो उठे हैं और बोर्ड परीक्षाओं में अपनी भूमिका को लेकर मंथन कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार शनिवार को देहरादून स्थित शिक्षा निदेशालय में विधायक अपने समर्थकों के साथ एक सरकारी विद्यालय का नाम बदलने के मुद्दे पर चर्चा के लिए पहुंचे थे। शुरुआती बातचीत सामान्य माहौल में हुई, लेकिन किसी बिंदु पर विवाद बढ़ गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

आरोप है कि इसी दौरान विधायक और उनके साथ मौजूद कार्यकर्ताओं ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के कार्यालय में घुसकर उनके साथ मारपीट की। निदेशक का कहना है कि यह घटना प्रशासनिक गरिमा के विरुद्ध है और अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि अभी तक मामले में पुलिस स्तर पर ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, लेकिन इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता दिख रहा है।

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घटना की खबर मिलते ही शिक्षक संगठनों में व्यापक रोष फैल गया। शिक्षकों का कहना है कि जब एक वरिष्ठ अधिकारी अपने कार्यालय में सुरक्षित नहीं है, तो सामान्य शिक्षक कैसे निश्चिंत होकर कार्य कर सकते हैं। इसी विरोध के तहत शिक्षकों ने शिक्षा निदेशालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर यातायात भी प्रभावित किया।

शिक्षक आंदोलन अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है। राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने कहा कि सरकार से वार्ता जारी है, लेकिन यदि आरोपी विधायक की गिरफ्तारी नहीं होती और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तो संगठन बोर्ड परीक्षाओं के बहिष्कार का निर्णय ले सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम शिक्षकों के सम्मान और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया जाएगा।

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सबसे बड़ी चिंता छात्रों के भविष्य को लेकर है। प्रदेश में बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं और लाखों छात्र लंबे समय से इसकी तैयारी कर रहे थे। यदि परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो परीक्षा कार्यक्रम बाधित होने के साथ छात्रों पर मानसिक दबाव भी बढ़ सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान शीघ्र निकाला जाना आवश्यक है ताकि छात्रों के हित प्रभावित न हों। वहीं अभिभावकों में भी चिंता बढ़ रही है कि कहीं राजनीतिक टकराव का खामियाजा उनके बच्चों को न भुगतना पड़े।

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