कराटे में उत्तराखंड का डंका! 30 स्वर्ण पदकों के साथ लगातार तीसरी बार बना नेशनल चैंपियन

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समाचार सच, हल्द्वानी/नई दिल्ली। उत्तराखंड के नन्हे कराटे योद्धाओं ने एक बार फिर देशभर में अपने दमखम का लोहा मनवाया है। राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित नेशनल कराटे चैंपियनशिप में उत्तराखंड की टीम ने ऐसा शानदार प्रदर्शन किया कि पूरा स्टेडियम “देवभूमि” के नाम से गूंज उठा।

28 से 30 दिसंबर तक चली इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड के 32 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और रिकॉर्ड 30 स्वर्ण पदक जीतकर लगातार तीसरे वर्ष नेशनल चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि न सिर्फ खिलाड़ियों की मेहनत का प्रमाण है, बल्कि उत्तराखंड को देश का कराटे पावरहाउस भी साबित करती है।

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उत्तराखंड फुल कॉन्टैक्ट कराटे एसोसिएशन के सचिव महेंद्र सिंह भाकुनी ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन नेशनल कराटे फेडरेशन एवं फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा किया गया था। उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने कीहोंस, कुमीते (फाइटिंग) और काताकृतीनों वर्गों में दबदबा बनाते हुए पदकों की झड़ी लगा दी।

कीहोंस इवेंट में दिविता बिष्ट और संचित जोशी ने स्वर्ण पदक जीतकर शानदार शुरुआत की। वहीं कुमीते (फाइटिंग) इवेंट में दिविता बिष्ट, निर्वाणी जोशी, ख्याति तिवारी, सृष्टि थापा, निहारिका, तनिष्का बोरा, वैष्णवी बेलवाल, कल्पना दानू, सारांश जोशी, लक्ष्य सिंह नेगी, जतिन बिष्ट, अरनब मेहरा, आदित्य निगलतिया, देवांश खोलिया, आर्थिक चौधरी, विनय बिष्ट, आदित्य चौधरी, दीपांशु धनिक और प्रियांशु बोरा समेत कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर उत्तराखंड का परचम लहराया।

काता इवेंट में भी उत्तराखंड का जलवा कायम रहा, जहां निहारिका, कल्पना दानू, जतिन बिष्ट, आर्थिक चौधरी, दीपांशु धनिक और धनविनय सिंह रौतेला ने स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

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इतना ही नहीं, टीम काता इवेंट में भी उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने कमाल किया। अंडर-18 गर्ल्स, अंडर-12 बॉयज और अंडर-14 कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीतकर टीम ने अपनी गहराई और तैयारी का शानदार प्रदर्शन किया।

रजत और कांस्य पदकों की बात करें तो उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने इन वर्गों में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया और कुल मिलाकर पदकों की संख्या ने प्रतियोगिता में सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया।

इस ऐतिहासिक जीत पर टीम कोच रोहित यादव और टीम मैनेजर लक्ष्मण भट्ट ने सभी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता अनुशासन, कड़ी मेहनत और टीम भावना का परिणाम है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड के कराटे खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि देवभूमि अब सिर्फ आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि खेलों की भी नई ताकत बनकर उभर रही है।

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