राशि के अनुसार राखियों का रंग तय करें

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। भाई बहन के प्यार के प्रतीक रक्षाबंधन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। बहने ससुराल से माइके आने को तैयार हैं तो बाजार में मेंहदी व श्रृंगार के सामान के अलाव राखियां भी दुकानों पर मौजूद हैं। श्रावण मास की शुक्ल पूर्णिमा 22 अगस्त को है। 21 अगस्त को पूर्णिमा शाम सात बजे से शुरू होकर 22 अगस्त शाम 5.31 तक रहेगी। आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि कथानक है कि भगवान श्रीकृष्ण को एक बार हाथ में चोट लग गई थी, तो द्रोपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ में बंधा था। श्री कृष्ण ने उसे रक्षा सूत्र मानते हुए कौरवों की सभा में द्रोपदी की लाज बचाई थी इस वर्ष रक्षाबंधन का शुभ समय 22 को सुबह 06.15 बजे से शाम 5.31 बजे तक है।
आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि राशियों के अनुरूप रखी के रंगों का चयन कर उत्तम होता है। शुभ मुहूर्त में राखी बांधने के साथ ही आरती के थाल में रोली के साथ अक्षत का जरूर प्रयोग करें। यह समृद्धि का प्रतीक है। आचार्य कृष्ण कुमार मिश्रा ने बताया कि राखियों के रंग को लेकर बहनों को सतर्क रहना चाहिए। जैसे सात रंगों से बने सूर्य के प्रकाश से चारों और उजाला फैलता है वैसे ही रखी के त्योहार में रंग भाइयों की कीर्ति को प्रकाशित करने का काम करते हैं। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि रंगों से पाजिटिव एनर्जी का सूत्रपात होता है जो जीवन में आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। ऐसे में हम सभी को इसका ध्यान रखना चाहिए। जीवन में रंग ही सब कुछ है।


जैसी राशि वैसी राखी

मेष - लाल, गुलाबी या पीले रंग की।
वृष - श्वेत, नीली, रेशमी-चमकीला।
मिथुन - नीला और गुलाबी।
कर्क -पीली, चमकीली-रेशमी।
सिंह - गुलाबी या पीेली।
कन्या - सफेद, हरा, गुलाबी।
तुला - पीली या गुलाबी।
वृश्चिक - लाल, गुलाबी या पीली।
धनु - पीली, लाल या गुलाबी।
मकर - नीला, चमकीला-सफेद।
कुंभ - सफेद-नीली।
मीन - सफेद, नीली-चमकीली।
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