समाचार सच, हल्द्वानी (धीरज भट्ट)। भारतीय सैन्य इतिहास का नाम गौरव से लिया जाता है। यहां के अधिकतर युवाओं का शौक फौज में जाना रहा है। प्रारम्भ से ही उत्तराखण्ड को सैन्य बहुल वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। यहां के सैनिकों ने भारतीय इतिहास में अपना नाम उल्लेखनीय अक्षरों में अंकित कराया है। चाहे 1947-1948 में पाकिस्तान के साथ कबाइली युद्ध हो, 1962 में चीन के साथ युद्ध, 1965, 1971 में पाक के साथ युद्ध हो या 1999 में कारगिल में पाक की नापाक हरकत हो, सभी घटनाओं में यहां में रणबांकुरो ने अपना जौहर दिखाया है।
उत्तराखण्ड राज्य की अर्थव्यवस्था को मनीआर्डर वाली अर्थव्यवस्था कहा जाता है। इसमें ज्यादा योगदान फौजियों का होता है। इसे एक बेमिसाल परम्परा करें या देश भक्ति का जज्बा यहां पेंशनर फौजी व सक्रिय सेवा में फौजियों की संख्या लाखों में है। यहां कोई घर ऐसा नहीं होगा, जहां से कोई फौजी न हो। ज्ञात हो कि देश की तीन जानी मानी रेजीमेंट कुमांऊ रेजीमेंट रानीखेत, गढ़वाल रेजीमेंट लैंसडौन, बंगाल इन्जीनियर्स रूड़की में स्थित है।

रानीखेत स्थित कुमांऊ रेजीमेंट के मेजर सोमनाथ शर्मा को भारत का प्रथम परमवीर चक्र जीतने का गौरव प्राप्त है। इसी परम्परा आगे बढ़ाते हुए 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान मेजर शैतान सिंह ने भी परमवीर चक्र जीता था, जिसकी चर्चायें आज भी होती है। हालांकि यह दोनों यहां के मूल निवासी नहीं थे, लेकिन यहाँ की गौरवशाली परम्परा के वाहक तो माने जा सकते हैं।
राज्य में अनेक सैन्य अधिकारी ऊँचे पदों में पहुंचे है, जिसमें विपिन चन्द्र जोशी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वे उत्तराखण्ड व यूपी के प्रथम थल सेना अध्यक्ष रहे थे। वे 1993 से नवम्बर 1994 तक भारत के थल सेना अध्यक्ष रहे थे।

अल्मोड़ा के एडमिरल डीके जोशी नेवी के चीफ रहे चुके है। इसके अलावा ले0 जनरल गजेन्द्र सिंह रावत, ले0 जनरल एएस रावत, ले0 जनरल एमएस गुसाई, ले0 जनरल एमएस लखेरा, ले0 जनरल एलएस रावत, ले0 जनरल पीसी जोशी, ले0 जनरल सुरेन्द्र शाह, ले0 जनरल एलएमएस रावत, ले0 जनरल तेजपाल सिंह रावत, ले0 जनरल हीरा बल्लभ काला, ले0 जनरल गंभीर सिंह नेगी, ले0 जनरल चन्द्रशेखर जोशी, ले0 जनरल मोहन चन्द्र भंडारी, ले0 जनरल चन्द्र बल्लभ झल्डियाल, ले0 जनरल एसएस डिमरी, एयर मार्शल घनश्याम गुरूरानी, एयर मार्शल दिनेश चन्द्र ध्यानी, एयर मार्शल बृजेशधर जुयाल, मेजर जनरल बीसी खन्डूरी, मेजर जनरल माया टम्टा, मेजर जनरल माया टम्टा, मेजर जनरल एसएस कार्की प्रमुख है। इसके अलावा ब्रिगेडियर से लेकर नीचे के पदों पर हजारों अधिकारी कार्यरत हैं। इधर अर्द्धसैनिक बलों में भी कई अधिकारी ऊँचे पदों पर रहे चुके है। जिनमें डीके आर्या बीएसएफ और सुभाष जोशी एनएसजी के डीजीपी रहे चुके है।

एनएसए डोभाल पर राज्य को गर्व
पूर्व आईपीएस अधिकारी व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी राज्य के पौड़ी गढ़वाल से है। उनकी गिनती तेज तर्रार अधिकारी में मानी जाती है। उन्होंने अनेक समझौते कराने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें भारत का सुपर कॉक भी माना जाता है। उत्तराखण्ड को अपने सपूत पर गर्व है।

सीडीएस रावत भी उत्तराखण्ड से
पूर्व सेना प्रमुख विपिन रावत भारत के पहले सीडीएस बने है। उन्होंने एक जनवरी 2020 को अपना कार्यभार संभाला। इससे पूर्व वह भारत के 27 वें थल सेना अध्यक्ष थे। वे 1 सितम्बर 2016 को भारतीय सेना के उपसेना प्रमुख बने थे। उनके पास आतंकवाद के विरूद्ध अभियानों में काम करने का 10 वर्षों का अनुभव है।

अल्मोड़ा के लाल थे जोशी
जनरल विपिन चन्द्र जोशी उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश से थल सेना अध्यक्ष बनने वाले भारत के पहले व्यक्ति थे। वे 1 जुलाई 1993 से 18 नवम्बर 1994 तक भारत के 17 वें थल सेना अध्यक्ष रहे थे। वह दन्या (अल्मोड़ा) के रहने वाले थे। पहाड़ प्रेम उनमें कूट-कूट कर भरा था। वह अपनी मातृभाषा प्रति विशेष लगाव रखते थे।

कुमांऊ रेजीमेंट से बने हैं तीन जनरल
भारत में कुमांऊ रेजीमेंट सेना की पहली इकाई हैं जिसको देश को तीन थल सेना अध्यक्ष देने का गौरव प्राप्त हैं। जनरल एसएम श्रीनागेश 1955 से 1957, जनरल केएस थिमैय्या 1957 से 1961 और टीएन रैना 1975 से 1978 तक देश के थल सेना अध्यक्ष रहे।


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