केदारनाथ आपदा से भी नहीं लिया सबक

खबर शेयर करें

समाचार सच, देहरादून। रुद्रप्रयाग जनपद में स्थिति केदारनाथ में 16 जून 2103 की आपदा पूरी मानव जाति को झकझोर गई थी। उस आपदा में साढ़े चार हजार से अधिक लोगों की मौत हुई या लापता हो गए थे। चार हजार से अधिक गांवों का संपर्क टूट गया। कई ग्रामीण तो अपने घर के भीतर ही मारे गए। करीब 11 हजार मवेशी भी बाढ़ और मलबे की भेंट चढ़ गए। सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ में बह गई। सैकड़ों घर, होटल, दुकानें वाहन नदी में समा गए। यही नहीं तब सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आइटीबीपी की टीमों ने महा अभियान चलाकर यात्रा मार्ग में फंसे 90 हजार यात्रियों को, जबकि स्थानीय पुलिस ने 30 हजार यात्रियों को सकुशल रेस्क्यू किया। इस आपदा में हाईवे, संपर्क मार्ग और पुलों का भी नामो-निशान मिट गया था। गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग रामबाड़ा और गरुड़चट्टी पड़ाव से निकलता था, लेकिन मंदाकिनी नदी के विकराल रूप ने रामबाड़ा को नक्शे से ही मिटा दिया। इस तबाही के बाद सरकारी मशीनरी को सालों यहां पुनर्निर्माण और बसागत में लग गए। हजारों करोड़ के नुकसान की भरपाई अभी तक नहीं हो सकी। लेकिन, सिस्टम और मानव प्रवृत्ति की हठधर्मिता देखिए कि सबक लेने की बजाय संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्य, नदियों पर बांध बनाने का कार्य नहीं थमा। सबसे बड़ी बात कि इसमें ग्लेशियरों को लेकर कोई अध्ययन नहीं किया गया।

ADVERTISEMENTS
यह भी पढ़ें -   नैनीताल दुग्ध संघ चुनाव में बड़ा फैसला! 245 में 238 समितियों में निर्विरोध निर्वाचन, मुकेश बोरा 12वीं बार बने अध्यक्ष
Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440