थायरॉइड हार्माेन को नियंत्रित रखने के लिए करें ये आयुर्वेदिक इलाज

खबर शेयर करें

समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। हमारे गले में थायरॉइड ग्रंथि होती है जो गले में स्वरयंत्र के ठीक नीचे व सांसनली के दोनों तरफ तितली के पंख के समान फैली होती है। इससे निकलने वाले हार्माेन जब हमारे खून में कम या अधिक मात्रा में पहुंचते हैं तो शरीर में कई प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं। थायरॉइड ग्रंथि को मस्तिष्क में मौजूद पिट्यूटरी ग्रंथि नियंत्रित करती है जिससे थायरॉइड स्टीम्युलेटिंग हार्माेन (टी.एस.एच.) की उत्पत्ति होती है। थायरॉइड ग्रंथि जब कम मात्रा में हार्माेन बनाने लगती है तो शरीर में हाइपोथायरॉइडिज्म की समस्या हो जाती है। जानते हैं इसके बारे में।

रोग की वजह
ऑटो-इम्यून-डिसऑर्डर (इसमें शरीर का रोग प्रतिरोधी तंत्र थायरॉइड ग्रंथि पर आक्रमण कर देता है), शरीर में अन्य हार्माेन का असंतुलन, रेडिएशन, दवाओं व सर्जरी के दुष्प्रभाव, कम मात्रा में आयोडीन का सेवन और फैमिली हिस्ट्री होने पर हाइपोथायरॉइडिज्म की समस्या हो सकती है।

लक्षणों को पहचानें
वजन बढऩा, थकान व कमजोरी, उदासी, मांसपेशियों व पैरों में सूजन और खिंचाव, याददाश्त में कमी, आंखों में सूजन, त्वचा का रूखा व मोटा होना, कब्ज, बालों का झडऩा, माहवारी की अनियमितता या अधिक स्राव, सर्दी लगना व कम पसीना आना, आवाज में भारीपन और नाखून मोटे होकर धीरे-धीरे बढऩे जैसे लक्षण होने लगते हैं।

ये चीजें खाएं
प्याज, चुकंदर, कचनार, काला नमक, मूली, शलजम, ब्राह्मी, कमल-ककड़ी, कमलनाल, सिंघाड़ा, हरी-सब्जियां, हल्दी, फूल-मखाने, अनार, सेब, मौसमी, आंवला, जामुन, अनानास, करेला, टमाटर, पालक, आलू, मटर, टिंडा, परवल, पनीर, दूध, दही और लस्सी आदि को अपनी डाइट में शामिल करें।

आयुर्वेदिक इलाज से होगा लाभ

  • ब्राह्मी, गुग्गुलु, मघ पीपल, कालीमिर्च, त्रिफला, दाख (मुनक्का), दशमूल इत्यादि का नियमित प्रयोग करने से हार्माेन में असंतुलन की समस्या दूर होती है।
  • 10 किलो गेंहू के आटे में दो किलो बाजरे का आटा व दो किलो ज्वार का आटा मिलाएं। इस आटे से बनी रोटियां खाने से लाभ होता है।
  • 100 ग्राम की मात्रा में दानामेथी व सूखे धनिए को बारीक पीस लें। रात के समय इस मिश्रण की दो छोटे चम्मच की मात्रा दो गिलास पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट इस पानी को पिएं व मिश्रण को चबाकर खाएं।
  • आंवला, गोखरू व गिलोय चूर्ण को समान मात्रा में मिलाएं। इसे 1-3 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ लेने से रोगियों का तनाव दूर होता है।
  • कचनार गुग्गुलु की 3-3 गोलियां दिन में दो बार, दशमूलारिष्ट या दशमूल क्वाथ 20-20 मिली पानी से लें।
Ad AdAd Ad Ad Ad AdAd Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440