शमी पूजा- ज्योतिषाचार्य पंडित धनंजय पांडेय ने बताया कि शमी के पेड़ का संबंध शनि देव और पांडवों से है. पांडवों ने अपने हथियार इसी पेड़ में छिपाए थे. दशहरा के दिन शमी की पूजा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे शनि दोष दूर होता है.
शस्त्र और आयुध पूजा- औजारों, वाहनों, उपकरणों और किताबों की पूजा करना आजीविका के साधनों के प्रति आभार प्रकट करने का एक तरीका है. साथ ही, यह प्रार्थना भी है कि हम इनका उपयोग कुशलता और सावधानी से करें.
अपराजिता पूजा- इसमें देवी के श्अपराजिताश् (जिन्हें कोई हरा न सके) स्वरूप की पूजा की जाती है. कई परिवार सुरक्षा और साहस के लिए देवी अपराजिता से प्रार्थना करते हैं. ज्योतिषीय मान्यता है कि दशहरा पर अपराजिता का पूजन करने से पराजय का सामना नहीं करना पड़ता.
नीलकंठ के दर्शन- उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में दशहरा के दिन नीलकंठ (पक्षी) को देखना बहुत शुभ माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र की मान्यता के अनुसार, दशहरा पर नीलकंठ के दर्शन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही, ब्रह्महत्या का दोष दूर होता है.
दशहरा पूजन के प्रमुख चार उपाय और उनके ज्योतिषीय लाभ
पूजन का प्रकार – मुख्य संबंध / पौराणिक संदर्भ प्रमुख ज्योतिषीय लाभ
शमी पूजा – शनि देव और महाभारत काल के पांडव, शनि दोष दूर होता है और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है.
शस्त्र और आयुध पूजा आजीविका के साधन, वाहन, उपकरण और किताबें आजीविका के साधनों के प्रति आभार प्रकट होता है और सावधानी बढ़ती है.
अपराजिता पूजा देवी अपराजिता (जिन्हें कोई हरा न सके) जीवन में पराजय का सामना नहीं करना पड़ता तथा सुरक्षा व साहस मिलता है.
नीलकंठ दर्शन उत्तर भारत की शुभ पक्षी दर्शन परंपरा घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और ब्रह्महत्या का दोष दूर होता है.
ज्योतिष के नजरिए से दशहरा पर क्या करना शुभ होता है?
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ- रामायण के अनुसार, रावण से युद्ध से पहले ऋषि अगस्त्य ने भगवान राम को यह स्तोत्र सिखाया था. इस समय सूर्य तुला राशि में कमजोर स्थिति में है, इसलिए सूर्याेदय या दोपहर के समय इसका पाठ करना आत्मविश्वास और स्पष्टता पाने का एक अच्छा उपाय है.
शमी पूजा- दशहरा पर शमी के पेड़ में जल चढ़ाएं. शमी के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं. साथ ही, शमी के कुछ पत्ते चढ़ाएं. ज्योतिषीय मान्यता है कि दशहरा के दिन इस उपाय को करने से शनि दोष दूर होता है.
दुर्गा और अपराजिता प्रार्थना- दशहरा पर देवी के कवच या अपराजिता स्तोत्र का पाठ करने के बाद नवरात्र पूजन का समापन करें. ऐसा करने से व्रत-पूजन का संपूर्ण फल प्राप्त होता है.
दान- दशहरा पर भोजन, किताबें, औजार या कपड़े दान करें या किसी छात्र या शिक्षक की मदद करें. दान करना एक ऐसा उपाय है, जो हर तरह की ग्रह-दशा में लाभकारी होता है.

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