समाचार सच, हल्द्वानी (मिथुन जायसवाल)। उत्तराखंड की राजनीति में जहां अक्सर दिखावे और आडंबर का बोलबाला देखने को मिलता है, वहीं कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे भी हैं जो अपनी सादगी से अलग पहचान बनाते हैं। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट उन्हीं में से एक हैं, जो आज भी साधारण जीवन जीने में विश्वास रखते हैं और अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि “मोहनदा” आज भी वैसा ही जीवन जी रहे हैं जैसा वर्षों पहले जीते थे। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने न अपनी गाड़ी पर ‘विधायक’ का बोर्ड लगवाया और न ही घर पर कोई नामपट्टिका लगाई। यहां तक कि उनके घर को जाने वाली सड़क पर भी उनके नाम का कोई उल्लेख नहीं है, जिससे पहली बार आने वाले लोगों को रास्ता पूछना पड़ता है।
डॉ. बिष्ट अपने घर आने वाले लोगों से बेहद सहज और आत्मीयता के साथ मिलते हैं। वे फरियादियों के साथ सामान्य कुर्सी पर बैठकर बातचीत करते हैं और अन्य नेताओं की तरह कोई आलीशान व्यवस्था नहीं रखते। उनकी यही सादगी उन्हें जनता के और करीब लाती है।
सबसे खास बात यह है कि उन्होंने आज तक अपने घर की सड़क तक नहीं बनवाई। इस पर उनका साफ कहना है कि पहले क्षेत्र के उन इलाकों में सड़क बनेगी जहां जरूरत है, उसके बाद ही वे अपने घर की सड़क बनवाएंगे। जनसभाओं में वे अक्सर कहते हैं कि उनका वेतन भी जनता का है, और वे जरूरतमंदों की व्यक्तिगत मदद इसी भावना से करते हैं।
भाषा और संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी उल्लेखनीय है। डॉ. मोहन सिंह बिष्ट आमजन से अपनी मातृभाषा में संवाद करते हैं और वे उत्तराखंड के पहले ऐसे विधायक हैं जिन्होंने विधानसभा में कुमाऊंनी भाषा में भी अपनी बात रखी।
‘जसदा’ के बाद अब ‘मोहनदा’ की पहचान
रानीखेत के पूर्व विधायक जसवंत सिंह बिष्ट को लोग स्नेह से “जसदा” कहकर पुकारते थे। उसी तरह लालकुआं में डॉ. मोहन सिंह बिष्ट को भी लोग प्यार से “मोहनदा” कहते हैं। यहां लोग उन्हें उनके आधिकारिक नाम से कम और इस आत्मीय संबोधन से अधिक पहचानते हैं।



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