समाचार सच, हल्द्वानी। हवलदार नंदन सिंह चौधरी का जन्म दिनांक 8 जून 1955 को हुआ। गाँव के ही स्कूल से कक्षा 10 उत्तीर्ण करके वे दिनांक 26 दिसंबर 1972 को सेना में भर्ती हो गए और उन्हें 5 राजपूत में तैनाती दी गई। मेजर बी एस रौतेला ने बताया कि हवलदार नंदन सिंह एक होनहार, मेहनती, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक थे। समय के साथ-साथ वह हवलदार के पद पर पदोन्नत हो गए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत की अग्रिम चौकियों पर बखूबी चौकसी की और देश सेवा में डटे रहे। 1984 में आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी में ऑपरेशन ब्लू स्टार में भी हिस्सा लिया। वर्ष 1987-1988 में भारतीय सेना को श्रीलंका में भेजा गया जिसमें 5 राजपूत भी शामिल थी। दिनांक 8 जनवरी 1988 को वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए और भारतीय सेना की परंपरा को निभाते हुए शहीद हो गए। उनकी वीर नारी श्रीमती शांति चौधरी बताती हैं कि शहादत के वक्त उनका बड़ा बेटा 5 वर्ष और छोटा बेटा मात्र 3 वर्ष का था। उस समय उन्हें कुछ भी जानकारी नहीं थी लेकिन उन्हें अपने पति के शब्द हमेशा याद रहते थे कि बच्चों की शिक्षा की अच्छी व्यवस्था करनी है। अतः 1990 में वे अपने बच्चों को लेकर कौसानी से हल्द्वानी आ गई। उनका बड़ा बेटा अब भारतीय सेना में और छोटा बेटा प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है।
ज्ञात हो कि शहीद हवलदार नंदन सिंह चौधरी के दादाजी श्री बुद सिंह ने भी अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे। मातृभूमि को अंग्रेजों से मुक्त कराने के लिए वह आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए थे। जिसके लिए उन्हें स्वतंत्रता के बाद कौसानी में जागीर प्रदान की गई और वे सपरिवार लैंसडाउन से कौसानी आकर बस गए थे।
समाचार सच परिवार शहीद हवलदार नंदन सिंह चौधरी की शहादत को सलाम करता है और उनको नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता है। साथ ही उनके बेटों के उज्जवल भविष्य की कामना करता है।


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