चाइल्ड हॉस्पिटल ने इन नियमों का कर लिया होता पालन, तो नहीं जाती 7 बच्चों की जान, क्यों उठ रहे अस्पताल पर लापरवाही के सवाल

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समाचार सच, दिल्ली (एजेन्सी)। दिल्ली के विवेक विहार इलाके के चाइल्ड हॉस्पिटल में लगी आग से 7 नवजात बच्चों की मौत हो गई। अब अस्पताल और और प्रशासन लापरवाहियों को लेकर सवालों के घेरे में है। क्योंकि जो नियम इस तरह के हादसों को कंट्रोल करने के लिए बनाए गए थे उन्हें लागू ही नहीं किया गया।

पांच साल पहले दिल्ली सरकार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन की अध्यक्षता वाली दिल्ली सरकार की एक कमेटी ने छोटे अस्पतालों और नर्सिंग होमों को ‘अग्नि सुरक्षा नियमों’ के दायरे में लाने के लिए दिशानिर्देशों का एक मसौदा तैयार किया था। फिर भी इस घटना से यह स्पष्ट है कि दिशानिर्देश कभी लागू ही नहीं किए गए और कागज पर ही बने रहे।

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक ने आदेश दिया था कि सभी अस्पताल जो दो मंजिल से ज्यादा ऊंचे हैं, या 9 मीटर से ज़्यादा ऊंचाई वाले हैं, उन्हें ‘अग्नि सुरक्षा’ मंजूरी की आवश्यकता है।

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इसके अलावा नियम यह कहते हैं कि अस्पतालों सहित सभी व्यावसायिक भवनों में अग्निशमन वाहन पहुंच सके इसलिए इनके रास्तों में सड़क 6 मीटर चौड़ी और भवन के भीतर 2.4 मीटर चौड़े गलियारे और 2 मीटर चौड़ी सीढ़ियां होनी चाहिए। नियम ये भी कहते हैं कि अस्पताल में भूमिगत तौर पर 75,000-लीटर पानी जमा करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि आग लगने की स्थिति में इसे उपयोग में लिया जा सके। हालांकि इन नियमों को छोटे अस्पतालों पर लागू किया जाना मुश्किल था इसलिए सिटी के 600 से ज़्यादा अस्पतालों ने विभाग से संपर्क भी किया था।

उस वक्त मंत्री सत्येन्द्र जैन की अध्यक्षता वाली एक कमेटी ने मानदंडों का एक अलग सेट तैयार किया था। जिसे रिहाइशी इलाकों में चलने वाले अस्पतालों और नर्सिंग होम द्वारा लागू किया जा सकता था। इन प्रस्तावित मानदंडों के मुताबिक इन अस्पतालों में अन्य आवश्यकताओं के अलावा स्प्रिंकलर और स्वचालित फायर अलार्म की आवश्यकता थी, लेकिन चौड़ी सीढ़ियों और गलियारों की शर्त को हटा दिया गया था।

इधर सोमवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि विवेक विहार के इस अस्पताल के पास अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं थी क्योंकि मौजूदा मानदंडों के अनुसार 9 मीटर से कम ऊंचाई वाले अस्पतालों को ऐसी मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। पूर्वी दिल्ली के अस्पताल में केवल दो मंजिलें हैं।

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शहर में एक नर्सिंग होम के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पूर्वी दिल्ली जैसे अस्पतालों के लिए भी दिशानिर्देश होने चाहिए ताकि उनके पास एक चेकलिस्ट हो जिसका वे पालन कर सकें, भले ही उन्हें ज़रूरत न हो।” कुछ अन्य डॉक्टर और अस्पतालों के मालिक भी यह मानते हैं कि छोटे अस्पतालों के लिए नए नियम बनाए जाना जरूरी है।

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के तहत नर्सिंग होम फोरम ने कोविद के दौरान जारी किए गए डीजीएचएस नोटिसों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया था कि जिन इमारतों में नर्सिंग होम थे, उनमें से कई का निर्माण कड़े अग्नि सुरक्षा मानदंड जारी होने से पहले किया गया था और उन्हें कुछ राहत दी जानी चाहिए। मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में चल रही है।

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