हाथ और पैर देखकर जानें कैसा है व्यक्ति

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। प्राचीन ऋषि-महर्षियों के निरंतर चिंतन-मनन और तप-साधना द्वारा सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष ग्रंथों का निर्माण हुआ। इन ग्रंथों के निर्माण का मूल उद्देश्य जनहित रहा है और उनकी निवृत्ति विभिन्न उपायों द्वारा संभव है। अतरू यहां ‘अरुण संहिता’ ग्रंथ का सारांश सामुद्रिक शास्त्र के अंतर्गत प्रस्तुत है –

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हथेली की बनावट
हथेली मोटी या भारी हो- तो जातक सामान्य स्तर का जीवनयापन करता है।

हथेली पतली तथा कमजोर- ऐसा जातक गरीबी का जीवनयापन करने वाला होता है।

लम्बी हथेली – स्पष्टवादी व्यक्ति होता है।

लम्बी किन्तु गोल हथेली – अफसरशाही वाला, हंसमुख तथा सुधरी हुई हालत वाला जातक होता है।

अंगूठा – अंगूठा जितना लम्बा होगा व्यक्ति उतना ही अपने आप पर कंट्रोल करने वाला होता है तथा अंगूठा जितना छोटा होगा, व्यक्ति उतना ही चंचल होता है। स्वभाव से जिद्दी तथा हालात से तंग होता है (अर्थात आर्थिक स्थिति से)। अंगूठा सीधा रहता हुआ दिखाई दे और अंगूठे के नाखून वाला पौर पीठ की तरफ झुका हो तो ऐसे जातक की धन-दौलत दूसरों के (रिश्तेदारों के सगे संबधियों के) काम आती है। ऐसा जातक स्वभाव से अवश्य विनम्र होता है।

सख्त हाथ वाला जातक – राज करने वाला तथा उसकी मिसाल छोड़ने वाला होता है।

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नर्म हाथ वाला जातक- ऐसा जातक आरामपसंद होता है।

नर्म फैले हुए हाथ – ऐसा जातक सुस्त स्वभाव का होता है।

लम्बे हाथ वाला – जांच-पड़ताल की समझ वाला और उससे जीवन को उच्च बनाने वाला होता है।

हाथ की उंगलियों के नाखून – नाखून पीले हों तो जातक खून की कमी वाला, शारीरिक दृष्टि से कमजोर होता है।

उंगली की पोरी में एक चक्कर हो – ऐसा जातक कई प्रकार की विधाएं जानने वाला एवं राजा की भांति उत्तम शासक होता है।

उंगली की पोरी पर एक शंख हो – बृहस्पति की आयु (4/8/16) से माता-पिता को और उनसे सुख होगा और स्वयं उनकी अपनी आयु 75 वर्ष तक का भाग्य सुखमय होगा।

उंगलियों की पोरियों पर दो शंख हों : ऐसा जातक कम दिलवाला होता है।

तर्जनी उंगली का झुकाव मध्यमा उंगली की ओर हो – ऐसा जातक अपने इरादे का पक्का होता है तथा स्वतंत्र विचारों वाला, प्रगतिशील विचारों की ओर निरंतर अग्रसर तथा उन्हें क्रियाशीलता प्रदान करने की भावना रखने वाला, उत्साह भरी उम्मीद वाला होता है।

बृहस्पति रेखा – गुरु के पर्वत पर दो सीधी खड़ी रेखाएं या गुरु का निशान हाथ में हो, ऐसा जातक वह चाहे स्त्री हो या पुरुष जगतगुरु होता है।

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भाग्य रेखा – भाग्य रेखा सूर्य रेखा से न मिलती हो, ऐसे जातक के जीवन में भाग्य की कोई किरण दृष्टिगोचर नहीं होती।

विवाह रेखा – (कनिष्ठिका उंगली के नीचे तथा हृदय रेखा के ऊपर) विवाह रेखा यदि दोमुखी हो और उसकी एक शाखा मस्तिष्क रेखा को स्पर्श कर रही हो तो ऐसे व्यक्ति (स्त्री या पुरुष) का अंतर्जातीय विवाह होता है किन्तु विवाह असफल रहता है तथा तलाक हो जाता है। विवाह रेखा जितनी गहरी स्पष्ट और लालिमायुक्त, निर्दाेष व लम्बी होगी, उतना ही दाम्पत्य जीवन सुख परिपूर्ण होता है तथा दाम्पत्य जीवन दीर्घायु होता है। यदि विवाह रेखा टूटी हुई हो तो तलाक या जीवनसाथी की मृत्यु के कारण वैवाहिक जीवन में बाधा आती है।

पैरों की उंगलियां और उनका फल – पैरों के निचले हिस्से में एड़ी से निकल कर रेखा अंगूठे तक चली जाए तो सवारी का सुख (वाहन सुख) मिलता है। अगर बायां पैर दाएं पैर से बड़ा हो तो व्यक्ति एक जगह नहीं टिकता। अंगूठा और तर्जनी आपस में मिलते हों तो भाग्य मंदा होता है। अंगूठा छोटा और तर्जनी बड़ी हो तो पहले लड़के या लड़की का सुख नहीं मिलता। अंगूठा और तर्जनी बराबर हो तो ऐसा जातक प्रसन्नता से रहने वाला तथा समृद्धवान होता है। तर्जनी मध्यमा से छोटी हो तो स्त्री का सुख मिलता है। तर्जनी मध्यमा से बहुत छोटी हो तो ऐसे जातक को स्त्री का सुख कम मिलता है। अनामिका मध्यमा से छोटी हो तो ऐसे जातक को स्त्री सुख थोड़ा मिलता है। कनिष्ठिका अनामिका से बड़ी हो तो ऐसे जातक का भाग्य अच्छा होता है।

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कनिष्ठिका अनामिका से बहुत बड़ी हो तो ऐसे जातक का भाग्य मंद होता है। कनिष्ठिका अनामिका से छोटी हो तो ऐसे जातक का भाग्य शुभ होता है। कनिष्ठिका अनामिका के बराबर हो तो ऐसे जातक को संतान का सुख मिलता है, परंतु ऐसे जातक की आयु कम होती है। पांचों उंगलियां बराबर हों तो ऐसा जातक अफसरशाही स्वभाव वाला होता है और पांचों उंगलियां एक-दूसरे से लम्बी हों, तो ऐसे जातक को संतान सुख अच्छा मिलता है।

पांव की उंगलियों के नाखून- नाखून सुर्ख ताम्बे के रंग के हों तो जातक राजा के समान या अधिकारी वर्ग की श्रेणी वाला होता है। यदि नाखून नीले रंग के हों तो ऐसे जातक भी अच्छी श्रेणी में आते हैं। पीले रंग के नाखून हों तो दीवान श्रेणी के अंतर्गत अर्थात अच्छी श्रेणी के जातक होते हैं।

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