harish rawat vs mohan

लालकुआं सीट पर हरदा आ गये मोहन की टक्कर में

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समाचार सच, हल्द्वानी/लालकुआं। विधानसभा लालकुआं सीट में समाचार सच की टीम ने भ्रमण किया। जहां दो लोगों में सीधी टक्कर दिख रही है। वहीं संध्या डालाकोटी उसको त्रिकोण बनाने की सोच रहीं है। अन्य दल भी चतुर्थकोण बनाने के लिये तैयार है। ऐसे में लालकुआं विधानसभा सीट किसके नाम जायेगी यह कहना अभी संभव नहीं है।

भाजपा ने मौजूदा मौजूदा विधायक नवीन दुम्का का टिकट काट कर एक कार्यकर्ता को यहां से टिकट दिया जिससे अंदरूनीय खमोशी छायी हुई है। इसका परिणाम क्या होगा वह तो भाजपा ही समझ सकती है, लेकिन हरीश रावत को घेरने के लिये श्याम दंड भेद के तरीके से उनको हराने के लिये प्रयासरत है। तमाम किस्म की भ्रांतियां फैलायी जा रही है। सवाल यह उठता है एक नौसीखिये के सामने 73 उम्र के बुजुर्ग अनुभवी ऐसे में लालकुआं विधानसभा के लोग किसको पसंद करेंगे। जैसा कि लालकुआं विधानसभा में कुल 121107 मतदाता है। जिसमें से महिलायें 57427 और पुरूष 63680 मतदाता है। 14 फरवरी को किसके पक्ष में कितना मतदान होता है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

समाचार सच टीम ने लालकुआं विधानसभा का भ्रमण किया। जहां तहां कुछ कांग्रेस के सर्मथक मिले वहीं भाजपा के भी समर्थक मिले। लेकिन एक एकाध छोड़कर कुछ विपक्षी पार्टियां भी मैदान में चुनावी समर में बनी हुई है। ये किसको नुकसान करेंगी, ये तो वक्त ही बतायेगा। सवाल ये है जीतेगा कौन। यह खगाड़ जीतेगा या फिर मोहन ?

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लालकुआं के मतदाताओं पर निर्भर है कि वह हरीश रावत को जिताते है या मोहन बिष्ट को? यह सोचना लालकुआं आम जनता की बात हैं। विकास और कथनी व करनी में कितना अंतर है, यह सब हम लोग जानते हैं। जहां तक हरीश रावत का कार्यकाल रहा है, उसको समझने व परखने में कोई अंतर ही नहीं दिखायी देता है। लेकिन जो उनका ढाई साल का कार्यकाल मुख्यमंत्री के रूप में जो रहा, उसको उत्तराखण्ड की आम आदमी नहीं भूली है। यदि 70 प्रतिशत मतदान होता है तो ऐसे में समाचार सच टीम को जो लोग मिले हैं उनका कहना है कि हरीश रावत आसानी से इस सीट को आसानी से निकाल ले जायेंगे। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यदि लालकुआं से हरीश रावत जीतेते है तो मुख्यमंत्री बनना उनका तय है, जिसको की कांग्रेस पार्टी नाकार नहीं सकती। जबकि हरीश रावत को हराने के लिये वहीं मोहन बिष्ट को जिताने के लिये राज्य से लेकर केन्द्र तक जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। लेकिन लालकुआं की जनता किस पर विश्वास करती है, विकास पर या कथनी और करनी पर।

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कहां तो यह भी जा रहा है कि हरीश रावत की यह अंतिम सांस है। लेकिन करोड़ो सांसे उनके साथ भी जुड़ी हुई है, कब किस सांस उखड़ती है यह तो जनता ही बतायेंगी। समाचार सच के मुताबिक गौलापार, चौरगलिया, लालकुआ, बिन्दुखत्ता, नवीन मंडी हल्द्वानी तक जो लोग मिले जो बातचीत के आधार पर कांग्रेस का पलड़ा थोड़ा बहुत भारी दिखायी देता नजर आ रहा है। वहीं मोहन बिष्ट के भी चुनाव प्रचार-प्रसार में कोई कमी नहीं दिखायी दे रही है। मोहन बिष्ट के साथ राज्य से लेकर केन्द्र तक एक जुट भाजपा नजर आ रही है। वहीं हरीश रावत इकला चलो की तर्ज पर लालकुआं विधानसभा ही नहीं 70 विधानसभाओं चुनाव प्रचार कर रह हैं। जहां भाजपा उनको सिर्फ लालकुआं सीट पर घेरने की कोशिश कर रही है। वहीं हरीश रावत अकेले भाजपा को 70 विधानसभा सीटों पर चुनौती दे रहे हैं।

प्रचार-प्रसार तरीका जो भी हो ? मान मर्यादा जो भी हो ? तर्क वितर्क जो भी हो ? अपनी मान मर्यादा जो भी हो उसका हमें पालन करना ही चाहिए। क्योंकि यह एक चुनावी समर है, हमने अपनी मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए, यही समाचार सत्य है।

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