हवलदार मनीराम से अपने तड़पते जवानों को देखा ना गया…

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समाचार सच, रामनगर। हवलदार मनीराम का जन्म दिनांक 11 फरवरी 1941 को हुआ था। कम उम्र में ही वे भारतीय सेना में भर्ती हो गए और उन्हें इंजीनियर रेजीमेंट में तैनाती मिली। मेजर बी एस रौतेला ने बताया कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनकी पल्टन को पठानकोट से अग्रिम चौकियों में तैनात किया गया। उन्हें कुछ बड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी दी गई। हवलदार मनीराम की टुकड़ी में 30 जवान थे। 4-5 दिसंबर की रात लगभग 2:00 बजे दुश्मन ने जबरदस्त हवाई हमले शुरू कर दिए। जिसमें कई सैनिक बुरी तरह घायल हो गए और तड़पने लगे। हवलदार मनीराम से अपने तड़पते जवानों को देखा ना गया और उन्होंने शीघ्र अपने अन्य जवानों के साथ घायल जवानों को उठाकर सुरक्षित स्थान पर रखा और उपचार करवाया। वे अपनी जान की परवाह ना करते हुए दो घायल सैनिकों को लेने के लिए दौड़े जिन्हें संयोग से उन्होंने ही बेसिक प्रशिक्षण दिया था। वे उनमें से एक जवान को अपने कंधे पर उठाकर सुरक्षित स्थान पर ले आए। लेकिन जैसे ही वे दूसरे जवान को लेने जा रहे थे तो उसी समय दुश्मन ने फिर हवाई हमला किया जिसमें हवलदार मनीराम शहीद हो गए।

अपनी जान की परवाह ना करते हुए अपने साथियों को बचाने के लिए उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल वीरता से अलंकृत किया गया।

शहादत के समय उनकी वीरांगना श्रीमती किशोरी देवी की उम्र मात्र 24 वर्ष थी। बड़ी बेटी साढे 3 वर्ष और बेटा 1 वर्ष का था। बेटा भी पिताजी की ही पलटन में भर्ती हो गया तथा देश सेवा कर अब सेवानिवृत्त हो गया है। सूबेदार मेजर नवीन पोखरियाल ने उनके रामनगर स्थित घर जाकर उनकी कुशलक्षेम पूछी।

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5 दिसंबर 1971 को जनपद के एक और जांबाज लांस नायक चंद्रमणि भी शहीद हुए थे।

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