जन्माष्टमी का व्रत स्वास्थ्य या किसी कारण से नहीं कर पाते हैं तो इन उपायों को करने से मिलता है व्रत के बराबर पुण्य

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार 16 अगस्त को मनाया जाएगा। इस त्योहार में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ व्रत या उपवास का भी खास महत्व होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन कई बार भक्त स्वास्थ्य या निजी कारणों से जन्माष्टमी व्रत नहीं कर पाते हैं, ऐसे में कुछ उपायों को करके व्रत का फल प्राप्त किया जा सकता है। जानें पंडित ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय से अगर जन्माष्टमी व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो किन उपायों से व्रत का फल मिल सकता है।

जन्माष्टमी व्रत का फल पाने के लिए करें ये उपाय
पंडित जी के अनुसार, अगर किसी खास वजह से जन्माष्टमी व्रत इस बार नहीं कर पा रहे हैं तो किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भरपेट भोजन कराना चाहिए। अगर ऐसा करना संभव नहीं है तो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को इतना धन का दान करें कि वह दो समय भरपेट भोजन कर सके।

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गायत्री मंत्र का करें जाप
पंडित की मानें तो अगर ऐसा करना भी संभव नहीं है तो गायत्री मंत्र का 1000 बार जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जन्माष्टमी व्रत का फल प्राप्त होता है।

पूजन सामग्री व पारण में लगने वाली सामग्री का दान
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अगर जन्माष्टमी व्रत के नियमों का पालन करना व रखना संभव नहीं है तो व्रत करने वाले व्यक्ति को समस्त पूजन सामग्री व व्रत पारण में लगने वाली चीजों का दान करना चाहिए।

भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत करें पूजा-अर्चना
पंडित जी के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी खास कारण से जन्माष्टमी व्रत करने में असमर्थ है, तो उसे जन्माष्टमी पूजन विधि-विधान से करना चाहिए। आधी रात को कृष्णजी के जन्म के बाद ही भोजन करना चाहिए।

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श्रीकृष्ण भगवान की भक्ति में रहें लीन
अगर जन्माष्टमी का व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो, भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहना चाहिए और उनसे क्षमा मांगनी चाहिए और ‘हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।

जन्माष्टमी व्रत का फल
ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक जन्माष्टमी व्रत को करने वाले व्यक्ति को सौ जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और अंत में वैकुंठ लोक को जाता है। अग्नि पुराण के अनुसार, भादो माह के कृष्ण पक्ष की रोहिणी नक्षत्र युक्त अष्टमी तिथि का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है। यह उपवास भोग और भोग प्रदान करता है।

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