कार्तिक मास: मन अशांत है और आत्मविश्वास की कमी है तो कार्तिक मास में रोज सुबह करें गायत्री मंत्र का जप

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिन्दी पंचांग का आठवां महीना कार्तिक शुरू हो रहा है। ये महीना 8 नवंबर तक रहेगा। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद अब ठंड शुरू हो जाएगी। कार्तिक मास शीत ऋतु का पहला महीना है और इस महीने में तन-मन को अच्छा बनाए रखने के लिए खान-पान के साथ ही जीवन शैली में भी कुछ बदलाव करना चाहिए। मन अशांत हो या आत्मविश्वास की कमी हो तो कार्तिक मास में रोज सुबह गायत्री मंत्र के जप के साथ ध्यान करने से लाभ मिल सकता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार कार्तिक मास में खाने में ऐसी चीजें शामिल करें, जिनसे शरीर मौसमी बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार हो सके। खाने में केसर वाला गर्म दूध, मौसमी फल, संतुलित आहार लें। खान-पान में बदलाव करके और जीवन शैली को सुधार कर हम रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं। खाने में गर्म तासीर वाली खाने की चीजें शामिल करें।

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कार्तिक मास में सुबह-सुबह करें गायत्री मंत्र का जप
कार्तिक माह में रोज सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और ऊँ सूर्याय नमरू मंत्र का जप करते हुए अर्घ्य अर्पित करें। सूर्य पूजा के बाद ध्यान करना चाहिए। ध्यान करते समय गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए। गायत्री मंत्र – ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गाे देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।। इस मंत्र का अर्थ यह है कि सृष्टि की रचना करने वाले, प्रकाशमान परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, परमात्मा का यह तेज हमारी बुद्धि को सही काम करने के लिए प्रेरित करें।

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मंत्र जप करते समय ये बातें ध्यान रखें

  • मंत्र जप के लिए किसी शांत और साफ स्थान का चयन करें।
  • सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद घर के मंदिर में गायत्री माता की मूर्ति या चित्र के सामने कुश के आसन पर बैठें।
  • गायत्री माता की पूजा करें और गायत्री मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें।
  • इसके लिए रुद्राक्ष की माला का इस्तेमाल करें।

मंत्र जप से दूर होता है तनाव और बढ़ता है आत्मविश्वास
इस मंत्र के जप से हमारा उत्साह और आत्म विश्वास बढ़ता है, अशांति दूर होती है। विचार सकारात्मक होते हैं, क्रोध जैसी बुराई शांत रहती है। एकाग्रता बढ़ती है।

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