समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कुशग्रहणी (कुशा घास) अमावस्या के रूप में जाना जाता है। अर्थात इसी दिन वर्ष पर्यंत के लिए कुशा ग्रहण की जाती है। विशेषतः पौरोहित्य कर्म करने वाले ब्राह्मणों को अवश्य ही कुशा वर्ष भर के लिए ग्रहण करके अपने घर पर रख लेनी चाहिए क्योंकि कुशा हर एक कर्म में प्रयुक्त होती है। शास्त्र पुराणों में बताया गया कि कुशा, गौ, ब्राह्मण ये तीनो ही हमेशा दूसरों को पवित्र करने वाले हैं जैसा कि गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प के अध्याय 9 के 13वें श्लोक में वर्णित है।
कुशमूले स्थितों ब्रह्नाा कुशमध्ये जनार्दनः।
कुशाग्रे शंकरो देवस्त्रयो देवाः कुशेस्थिताः।।
अतः इस दिन प्रमाद बस ना होकर अवश्य कुशा ग्रहण करें। इस वर्ष दिनांक 18 अगस्त 2020 को प्रातः 10ः45 से अमावस्या लगेगी। किंतु उदयव्यापिनी अमावस्या 19 अगस्त 2020 को प्रातः 8ः30 तक रहेगी अतः कुशा ग्रहण 19 तारीख को प्रातः 8ः30 तक कर लें।


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