हस्तरेखाओं से जानें जीवन की पहेलियां

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समाचार सच. अध्यात्म डेस्क। हस्तरेखाओं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी व्यक्ति की हथेली में बनी रेखाएं उसके भविष्य से सीधा संबंध रखती हैं। हथेली पर बनी रेखाओं के अध्ययन से व्यक्ति के स्वाभाव और भविष्य में घटने वाली घटनाओं का संकेत होती है।
जीवन रेखा – सामुद्रिक शास्त्र में हथेली पर जीवन रेखा को बहुत ही महत्व दिया जाता है। जीवन रेखा से उस व्यक्ति की आयु, मृत्यु, संकट, दुर्घटना का पता लगाया जाता है।
कहां होती है ये रेखा – जीवनरेखा अंगूठे और तर्जनी के बीच से निकलती हुई हथेली के निचले भाग जहां पर मणिबंध होती है वहां पर होती है। साफ और स्पष्ट जीवन रेखा खुशहाल जीवन का संकेत होती है वहीं कटी और अधूरी रेखा को अच्छा नहीं माना जाता है।
मस्तिष्क रेखा – जीवन रेखा जितनी महत्वपूर्ण मस्तिष्क रेखा भी मानी जाती है। इस रेखा से व्यक्ति की मानसिक क्षमता, बुद्धिबल और वैचारिक क्षमता का आकलन होता है।
कहां होती है ये रेखा – जहां से जीवन रेखा शुरू हेाती है वहीं से एक अन्य रेखा भी निकली है जो सीधी नीचे की ओर जाती है। इसी को मस्तिष्क रेखा कहा जाता है। यह रेखा जितनी निर्दोष होती है, उतनी शुभ और श्रेष्ठ मानी जाती है।
हृदय रेखा – हृदय रेखा से किसी व्यक्ति के दिल की बातें, संवेदनशीलता और गुण के बारे में पता चलता है।
कहां होती है ये रेखा – छोटी उंगली के नीचे से शुरू होकर तर्जनी उंगली की तरफ बढ़ने वाली रेखा हृदय रेखा कहलाती है।
भाग्य रेखा – सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार भाग्य रेखा से व्यक्ति के भाग्यशाली होने के बारे में पता चलता है। जिस किसी की भाग्यरेखा स्पष्ट, साफ और सीध लकीर में मणिबंध से चलकर शनि पर्वत पर जाकर मिले व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है।
कहां होती है ये रेखा – हथेली के नीचे से निकलकर जो रेखा मध्यमा उंगली के निकट जाती है उसे भाग्य रेखा कहते हैं।

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