5 जुलाई को लगेगा चंद्र ग्रहण : आचार्य सुशांत राज

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समाचार सच, देहरादून/हल्द्वानी। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण लगेगा। जुलाई के पहले सप्ताह में लगने वाला चंद्र ग्रहण इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण होगा। इससे पहले 10 जनवरी को पहला और 05 जून को दूसरा चंद्र ग्रहण लगा था। इस साल कुल चार चंद्र ग्रहण लगेंगे। साल का आखिरी और चौथा चंद्र ग्रहण 30 नवंबर को को लगेगा। वहीं इस साल दो सूर्य ग्रहण हैं। पहला 21 जून को लग चुका है, दूसरा 14 दिसंबर को लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा।
5 जुलाई को लगने वाले चंद्र ग्रहण का समय
उपच्छाया से पहला स्पर्श – सुबह 08.38 बजे
परमग्रास चन्द्र ग्रहण – सुबह 09.59 बजे
उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श – दोपहर 11.21 बजे
उपच्छाया की अवधि – 02 घण्टे 43 मिनट्स 24 सेकण्ड्स
चंद्र ग्रहण का सूतक काल:-
साल के तीसरे चंद्र में सूतक काल मान्य नहीं होगा। दरअसल ग्रहण में लगने वाला सूतक काल एक अशुभ समयावधि होती है। यह सूतक काल चंद्र ग्रहण लगने से तीन पहर (एक पहर 3 घंटे का होता है) अर्थात 9 घंटे पहले ही शुरु हो जाता है, जो ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म होता है। इस दौरान कई शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है।
चन्द्र ग्रहण का धार्मिक महत्व: – हिन्दू धर्म में चन्द्र ग्रहण एक धार्मिक घटना है जिसका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। हालांकि जो चन्द्र ग्रहण नग्न आंखों से स्पष्ट दिखाई नहीं देता है तो उस चन्द्र ग्रहण का धार्मिक महत्व नहीं होता है। मात्र उपच्छाया वाले चन्द्र ग्रहण नग्न आंखों से दृष्टिगत नहीं होते हैं इसीलिये उनका बहुत अधिक महत्व नहीं होता है। इस दौरान कोई भी ग्रहण से सम्बन्धित कर्मकाण्ड नहीं किए जाते है। केवल प्रच्छाया वाले चन्द्रग्रहण, जो कि नग्न आंखों से दृष्टिगत होते हैं, धार्मिक कर्मकाण्डों के लिये विचारणीय होते हैं। यदि चन्द्र ग्रहण आपके शहर में दर्शनीय नहीं हो परन्तु दूसरे देशों अथवा शहरों में दर्शनीय हो तो कोई भी ग्रहण से सम्बन्धित कर्मकाण्ड नहीं किया जाता है। लेकिन यदि मौसम की वजह से चन्द्रग्रहण दर्शनीय न हो तो ऐसी स्थिति में चन्द्रग्रहण के सूतक का अनुसरण किया जाता है और ग्रहण से सम्बन्धित सभी सावधानियों का पालन किया जाता है।

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5 जुलाई को लगने वाला चंद्र ग्रहण शक्तिशाली नहीं है लेकिन जिस तरह से बीते 30 दिनों में तीन ग्रहणों का योग बना है उससे इसके परिणाम शुभ नहीं माने जा रहा हैं। क्योंकि जब एक माह में दो या दो से अधिक ग्रहण लगते हैं तो इनका नकारात्मक प्रभाव सभी पर दिखाई देता है। इसलिए यह समय बहुत ही संयम के साथ बिताने का है।
ग्रहण का अर्थ:- 30 दिन के भीतर 3 ग्रहण का अर्थ अच्छा नहीं माना जाता है। ये ग्रहण आपदा, क्षति, विवाद और हिंसा का भी कारण बनते हैं। वहीं खेती और व्यापार के लिए भी ये शुभ नहीं माने जाते हैं।
5 जुलाई 2020 चंद्र ग्रहण
5 जुलाई चंद्र ग्रहण धनु राशि में लगने जा रहा है। जिस कारण धनु राशि के जातकों की परेशानी बढ़ सकती हैं। इसलिए अभी से उपाय आरंभ करने से ग्रहण की अशुभता को कम करने में मदद मिल सकती है। 5 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण वृश्चिक राशि में लगा था। ग्रहण के समय ज्येष्ठ नक्षत्र था।
डॉक्टर आचार्य सुशांत राज का मत है जब भी एक माह में दो से अधिक ग्रहण होते हैं तो परिणाम शुभ नहीं होता है। ऐसे में खरमंडल की स्थिति में पूजा अनुष्ठान से ही प्रतिकूल स्थिति को मात दी जा सकती है। एक माह में तीन ग्रहण से देश में कई तरह की समस्या हो सकती है। ग्रहण 5 जून से है। रात 11.15 बजे समाप्ति होगी। 6 जून को 2.34 बजे चंद्र ग्रहण है जिसमे शुक्र वक्री और अस्त रहेगा। गुरु शनि वक्री जैसे तीन ग्रह वक्री रहेंगे, जिसके कारण प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर होगा। शेयर बाजार से जुड़े हुए लोग सावधान रहें। यह ग्रहण वृश्चिक राशि पर बुरा प्रभाव डालेगा। किसी ख्यातिप्राप्त व्यक्ति की रहस्यात्मक मौत भी हो सकती है। परिवार में वाद विवाद का सामना करना पड़ सकता है।
चंद्रग्रहण:- चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में अवस्थित हों। इस ज्यामितीय प्रतिबंध के कारण चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है। चंद्रग्रहण का प्रकार एवं अवधि चंद्र आसंधियों के सापेक्ष चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं। चांद के इस रूप को श्ब्लड मूनश् भी कहा जाता है। चंद्र ग्रहण शुरू होने के बाद ये पहले काले और फिर धीरे-धीरे सुर्ख लाल रंग में तब्दील होता है। किसी सूर्यग्रहण के विपरीत, जो कि पृथ्वी के एक अपेक्षाकृत छोटे भाग से ही दिख पाता है, चंद्रग्रहण को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है। जहाँ चंद्रमा की छाया की लघुता के कारण सूर्यग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है, वहीं चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है। इसके अतिरिक्त चंद्रग्रहण को, सूर्यग्रहण के विपरीत, आँखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है, क्योंकि चंद्रग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चंद्र से भी कम होती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहण लगना अशुभ माना जाता है। इसलिए, ग्रहण की अवधि के दौरान अनेक शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। हम जानते हैं की चन्द्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह है, उपग्रह होने के कारण यह पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता है, इस परिक्रमा के दौरान चन्द्रमा का पथ परवलयकार होता है जिसके कारण चन्द्रमा कभी पृथ्वी के निकट तो कभी पृथ्वी के सबसे अधिकतम दूरी से गुजरती है। सुपर मून एक ऐसी खगोलीय घटना को कहते हैं जिसमे चन्द्रमा, पृथ्वी के सबसे करीब होता है (लगभग 3,56,500 किलोमीटर) इस स्थिति में चन्द्रमा अपनी वास्तविक स्थिति से चौदह गुना अधिक चमकीला नजर आता है। खगोल वैज्ञानिको द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार यह सुपर मून की घटना लगभग हर 33 साल बाद घटित होता है। जैसा की हमें पता हर महीने में कम से कम एक बार पूर्णिमा का दिन आता है जिसमे चाँद पूरा और चमकदार दिखाई देता है, परन्तु यह घटना महीने में अगर दो बार घटित हो तो दूसरे फुल मून अर्थात पूर्णिमा को हम ब्लू मून के नाम से जानते हैं।
5 जुलाई 2020 चंद्र ग्रहण
सुबह 08 बजकर 37 मिनट से 11 बजकर 22 मिनट तक
कहां दिखाई देगा: अमेरिका, दक्षिण पूर्व यूरोप और अफ्रीका।

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