
समाचार सच,अध्यात्म डेस्क। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने बताया की इस वर्ष 2020 में महाशिवरात्रि का पवित्र पर्व 21 फरवरी मनायी जायेगी। भगवान भोलेनाथ शिव शंकर को प्रसन्न करने का यह शुभ दिन सभी हिन्दू भक्तों के लिए विशेष होता है। इस साल महाशिवरात्रि 21 फरवरी 2020 को शाम को 5 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 22 फरवरी दिन शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगी। चूंकि 22 तारीख को पंचक प्रारंभ हो रहा है इसलिए 21 फरवरी को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। रात्रि प्रहर की पूजा शाम को 6 बजकर 41 मिनट से रात 12 बजकर 52 मिनट तक होगी। अगले दिन सुबह मंदिरों में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को सिर्फ शिवरात्रि कहा जाता है। लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाले शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। वैसे तो हर सप्ताह सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है। हर महीने में मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन साल में शिवरात्रि का मुख्य पर्व जिसे व्यापक रुप से देश भर में मनाया जाता है दो बार आता है। एक फाल्गुन के महीने में तो दूसरा श्रावण मास में। फाल्गुन के महीने की शिवरात्रि को तो महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसे फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु कावड़ के जरिये गंगाजल भी लेकर आते हैं जिससे भगवान शिव को स्नान करवाया जाता हैं।
महाशिवरात्रि पर्व का मुहूर्त 21 फरवरी निशिथ काल पूजा- 24ः08 से 25ः00, पारण का समय- 06ः57 से 15ः23 (22 फरवरी), चतुर्दशी तिथि आरंभ- 17ः20 (21 फरवरी), चतुर्दशी तिथि समाप्त- 19ः02 (22 फरवरी)। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने बताया की 117 साल बाद दुर्लभ योगों में 21 फरवरी को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, शनि स्वराशि में और शुक्र उच्च राशि में रहेगा। शिवरात्रि पर 28 साल बाद बनेगा विष योग। 21 फरवरी को बुधादित्य और सर्प योग भी रहेगा। शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। भोलेनाथ शिव को साधारण पूजा से प्रसन्न किया जा सकता हैं। शिव अपने भक्तों की छोटी-सी आराधना से प्रसन्न हो जाते हैं। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का बहुत अधिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस दिन व्रत रखने का भी बहुत अधिक महत्व बताया गया है।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष शुक्रवार, 21 फरवरी 2020 को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जायगा। 21 फरवरी को महाशिवरात्रि है। हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिव पूजा का महापर्व शिवरात्रि मनाया जाता है। जब सूर्य कुंभ राशि और चंद्र मकर राशि में होता है, तब फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात ये पर्व मनाया जाता है। 21 फरवरी की शाम 5.36 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। शिवरात्रि रात्रि का पर्व है और 21 फरवरी की रात चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिए इस साल ये पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा। इस बार शिवरात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है।
डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की इस साल शिवरात्रि पर शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। ये एक दुर्लभ योग है, जब ये दोनों बड़े ग्रह शिवरात्रि पर इस स्थिति में रहेंगे। 2020 से पहले 25 फरवरी 1903 को ठीक ऐसा ही योग बना था और शिवरात्रि मनाई गई थी। इस साल गुरु भी अपनी स्वराशि धनु राशि में स्थित है। इस योग में शिव पूजा करने पर शनि, गुरु, शुक्र के दोषों से भी मुक्ति मिल सकती है। 21 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। पूजन के लिए और नए कार्यों की शुरुआत करने के लिए ये योग बहुत ही शुभ माना गया है। इस साल शनि ने 23 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश किया है। शिवरात्रि यानी 21 फरवरी पर शनि के साथ चंद्र भी रहेगा। शनि-चंद्र की युति की वजह से विष योग बन रहा है। इस साल से पहले करीब 28 साल पहले शिवरात्रि पर विष योग 2 मार्च 1992 को बना था। इस योग में शनि और चंद्र के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए। शिवरात्रि पर ये योग बनने से इस दिन शिव पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। कुंडली में शनि और चंद्र के दोष दूर करने के लिए शिव पूजा करने की सलाह दी जाती है।
21 फरवरी को बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे, इस वजह से बुध-आदित्य योग बनेगा। इसके अलावा इस दिन सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य रहेंगे, इस वजह से सर्प भी बन रहा है। शिवरात्रि पर राहु मिथुन राशि में और केतु धनु राशि में रहेगा। शेष सभी ग्रह राहु-केतु के बीच रहेंगे। सूर्य और बुध कुंभ राशि में, शनि और चंद्र मकर राशि में, मंगल और गुरु धनु राशि में, शुक्र मीन राशि में रहेगा। सभी ग्रह राहु-केतु के बीच होने से सर्प योग बनेगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी पावन रात्रि को भगवान शिव ने संरक्षण और विनाश का सृजन किया था। मान्यता यह भी है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का शुभ विवाह संपन्न हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए तभी इसका फल मिलता है। महाशिवरात्रि पर रात्रि में चार बार शिव पूजन की परंपरा है।


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